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Guru Purnima 2021: ये हैं भारत के पांच महानतम गुरु, जिनके बताए मार्गों पर चलने से मिलती हैै सफलता

Fri, 23 Jul 2021 03:20 PM IST
संकल्प सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुरु पूर्णिमा 2021 - फोटो : Social media
गुरु पूर्णिमा का हिंदू धर्म में काफी खास महत्व है। गुरु की कृपा दृष्टि पाकर हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार खत्म होता है। गुरु ही हमारे जीवन को आकार देने का काम करते हैं। इनके द्वारा बताए गए मार्ग पर यदि चला जाए, तो जीवन में निश्चित रूप से सफलता हासिल होती है। बिना गुरु के हमारे जीवन का कोई अर्थ नहीं होता, वह अंधकार हो जाता है। इसी वजह से हमारे पौराणिक ग्रंथों में गुरुओं के महत्व को बड़ी ही बारीकी से बताया गया है। उनके ऊपर अनेकों श्लोक लिखे गए हैं। इन्हीं गुरुओं के सम्मान में हिंदू धर्म में हर वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। हमारे प्राचीन भारत में ऐसे कई महान गुरु हुए, जिन्होंने अपने ज्ञान और तपोबल के दम पर मनुष्यों को उनकी मुक्ति का रास्ता दिखाया। उन्होंन अपने ज्ञान के बल पर कई सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का काम किया। इसके अलावा इन बुद्ध पुरुषों ने मनुष्यों को सदा नैतिक कार्यों को करने की शिक्षा दी। गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर आज हम भारत के पांच महान गुरुओं के बारे में जानेंगे -
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भगवान शिव - फोटो : Social media

आदियोगी (भगवान शिव)

हमारे योगिक संस्कृति में भगवान शिव को देव नहीं बल्कि आदियोगी कहा जाता है। उन्हें इस सृष्टि में पहले योगी के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन आदियोगी ने पहले 7 ऋषियों को योग का विज्ञान सिखाया था। इसी वजह से वह आदियोगी अर्थात संसार के पहले गुरु कहलाए। उनके द्वारा बताई गई योग विद्या को अपनाकर कई बुद्ध पुरुषों ने कैवल्य के शिखर को छुआ। योग विद्या के जन्मदाता आदियोगी ही थे।

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भगवान बुद्ध - फोटो : Pixabay

भगवान बुद्ध 

भगवान बुद्ध की गिनती भारत के महान गुरुओं में की जाती है। बुद्ध की शरण में जितने लोग उस परम चेतना के स्तर पर पहुंचे, शायद ही इतने लोग कभी और पहुंचे हों। मान्यता है कि भगवान बुद्ध की आभा इतनी तेज थी कि उसके प्रभाव में आकर आस-पास के लोग भी शांत और आनंदित हो जाया करते थे।

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महर्षि वेदव्यास - फोटो : Social media

वेदव्यास

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म पाराशर और सत्यवती ऋषि के घर पर हुआ था। उन्होंने हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ महाभारत की रचना की थी। चारों वेदों की सबसे पहले व्याख्या उन्होंने ही की थी। इस कारण महार्षि वेदव्यास का हिंदू धर्म में काफी खास महत्व है और इनका नाम भारत के महान गुरुओं में शामिल होता है। इनके महान योगदान को देखते हुए आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता हैै। 
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महावीर - फोटो : Social media

महावीर 

महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। महावीर स्वामी की शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उस वक्त थी। उन्होंने लोगों को सदा अच्छे कर्म करने के लिए प्रोत्साहित किया। महावीर स्वामी ने लोगों को अहिंसा और सत्य के रास्ते पर चलने के लिए कहा। इनके बताए गए मार्ग पर चलकर कई लोगों ने जीवन की उस परम अनुभूती को महसूस किया, जहां पर अब तक बहुत कम लोग ही पहुंच पाए हैं। 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य का नाम भारत के महानतम गुरुओं में गिना जाता है। उन्होंने अपने ज्ञान के दम पर इतिहास की धारा को ही बदल कर रख दिया। एक साधारण से दिखने वाले बालक को शिक्षा देकर उसे भारत का महान शासक बना दिया। आचार्य चाणक्य ने राजनीति, अर्थव्यवस्था, धर्म, समाज आदि विभिन्न विषयों पर खुल कर अपने विचारों को व्यक्त किया, जिनका उल्लेख चाणक्य नीति में मिलता है। अगर इनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चला जाए, तो जीवन में निश्चित रूप से सफलता मिलती है। 
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