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Ganpati Utsav 2025: घर में गणपति स्थापना से पहले जरूर जानें ये नियम और सही पूजा विधि

Fri, 22 Aug 2025 11:21 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganesh Utsav: इस वर्ष चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 01:54 बजे से होगी और समापन 27 अगस्त को दोपहर 03:44 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा और इसी दिन गणेश स्थापना होगी।
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गणेश उत्सव 2025 - फोटो : amarujala
Ganesha Chaturthi 2025 Date: गणेश उत्सव हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है। इस दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर दस दिनों तक भक्ति और उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। इस वर्ष चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 01:54 बजे से होगी और समापन 27 अगस्त को दोपहर 03:44 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा और इसी दिन गणेश स्थापना होगी।
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ज्योतिष मान्यता के अनुसार, गणेश जी की स्थापना का सबसे शुभ समय मध्याह्न है, क्योंकि यही उनका जन्मकाल माना जाता है। इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक रहेगा। पूरे देश में धूमधाम से मनाए जाने वाले इस पर्व की खास तैयारी घरों और पंडालों में पहले से ही शुरू हो जाती है। हालांकि गणेश स्थापना से पहले कुछ विशेष नियम और विधियां जानना आवश्यक है। घर में गणपति जी बैठाने जा रहे हैं तो जानें सही विधि और नियम।
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गणेश पूजा आरंभ विधि और मंत्र - फोटो : instagram
गणेश पूजा आरंभ विधि और मंत्र
पूजा शुरू करने के लिए सबसे पहले एक पात्र में जल भरकर पूजा स्थल पर लाएं। जहां मंडप बनाया है, वहां चटाई बिछाकर बैठ जाएं। शुरुआत में कुशा और जल हाथ में लेकर यह मंत्र बोलें-
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥


इसके बाद जल को अपने ऊपर और पूजा की सभी सामग्रियों पर छिड़कें। तीन बार कुल्ला करें। फिर हाथ में जल लेकर क्रमशः “ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ हृषीकेशाय नमः” का जाप करते हुए तीन बार जल ग्रहण करें और अंत में हाथ धो लें।

अब उस स्थान पर थोड़े से अक्षत (अखंडित चावल) रखें, जहां  गणेश जी की स्थापना करनी है। उन्हीं अक्षतों के ऊपर भगवान गणेश की मूर्ति को विधिपूर्वक विराजमान करें और पूजा आरंभ करें।
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गणपति बप्पा स्थापना विधि - फोटो : instagram
गणपति बप्पा स्थापना विधि
  • गणेश जी की मूर्ति घर के उत्तर-पूर्व कोने में स्थापित करें और मूर्ति का मुख उत्तर दिशा की ओर रखें।
  • मूर्ति को विराजमान करने से पहले उसे साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें।
  • आसन को शुद्ध करने के बाद उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और ऊपर अक्षत (चावल) रखें। फिर गणपति बप्पा को शुद्ध हाथों से स्थापित करें।
  • भगवान गणेश को गंगाजल से स्नान कराएं।
  • मूर्ति के पास ऋद्धि-सिद्धि रखें। यदि मूर्तियां उपलब्ध न हों तो उनकी जगह सुपारी रखी जा सकती है।
  • गणपति जी के दाहिनी ओर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • पूजा की शुरुआत में हाथ में फूल और अक्षत लेकर ध्यान करें।
  • गणपति बप्पा को फल, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  • अंत में गणपति जी की आरती करके पूजा पूर्ण करें।
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गणेश स्थापना के नियम - फोटो : instagram
गणेश स्थापना के नियम
  • यदि आप घर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित कर रहे हैं, तो उसे हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में रखें और ध्यान रखें कि मूर्ति का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो।
  • स्थापना से पहले उस स्थान को अच्छी तरह से साफ और शुद्ध करें। वहां  कोई कचरा या अशुद्धि नहीं होनी चाहिए।
  • शुभ मुहूर्त में ही गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा, आरती और भोग जरूर करें। भगवान को धूप और दीप अर्पित करें।
  • एक बार मूर्ति स्थापित हो जाने के बाद उसे बीच में न हटाएं। गणेश जी को केवल विसर्जन के समय ही स्थानांतरित किया जा सकता है।
  • गणेश उत्सव के 10 दिनों तक नॉनवेज, शराब और नकारात्मक वस्तुओं का सेवन या घर में प्रवेश न कराएं।
  • कोशिश करें कि इस दौरान प्याज और लहसुन का प्रयोग भी न करें और सात्विक आहार लें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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