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Ganga Saptami 2022: आज गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ, सभी पापों से मिलती है मुक्ति

Sun, 08 May 2022 10:39 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
Ganga Saptami 2022: इस साल गंगा सप्तमी 08 मई 2022, दिन रविवार को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा मां की पूजा करनी चाहिए। हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का बहुत ही खास महत्व है। मां गंगा मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। इस दिन गंगा मां की पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही गंगा मैया के पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का क्षय होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा पूजन से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। इस दिन मां गंगा स्तोत्रम का पाठ करना बेहद शुभ माना गया है। इसका पाठ करने से मां गंगा का आशीर्वाद मिलता है....


 श्री गंगा जी की स्तुति

गांगं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम्।
त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु माम्॥
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
मां गंगा स्तोत्रम्॥
देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे ।
शङ्करमौलिविहारिणि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1॥

भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव
जलमहिमा निगमे ख्यातः ।
नाहं जाने तव महिमानं
पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ 2॥
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
हरिपदपाद्यतरङ्गिणि गङ्गे
हिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे ।
दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं
कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥ 3॥

तव जलममलं येन निपीतं,
परमपदं खलु तेन गृहीतम् ।
मातर्गङ्गे त्वयि यो भक्तः
किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ॥ 4॥

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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
पतितोद्धारिणि जाह्नवि गङ्गे
खण्डितगिरिवरमण्डितभङ्गे ।
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये,
पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये ॥ 5॥

कल्पलतामिव फलदां लोके,
प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके ।
पारावारविहारिणि गङ्गे
विमुखयुवतिकृततरलापाङ्गे ॥ 6॥
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
तव चेन्मातः स्रोतःस्नातः
पुनरपि जठरे सोऽपि न जातः ।
नरकनिवारिणि जाह्नवि गङ्गे
कलुषविनाशिनि महिमोत्तुङ्गे ॥ 7॥

पुनरसदङ्गे पुण्यतरङ्गे
जय जय जाह्नवि करुणापाङ्गे ।
इन्द्रमुकुटमणिराजितचरणे
सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये ॥ 8॥
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
रोगं शोकं तापं पापं
हर मे भगवति कुमतिकलापम्।
त्रिभुवनसारे वसुधाहारे
त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे॥ 9॥

अलकानन्दे परमानन्दे
कुरु करुणामयि कातरवन्द्ये ।
तव तटनिकटे यस्य निवासः
खलु वैकुण्ठे तस्य निवासः ॥10॥
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : iStock
वरमिह नीरे कमठो मीनः
किं वा तीरे शरटः क्षीणः ।
अथवा श्वपचो मलिनो दीनस्तव
न हि दूरे नृपतिकुलीनः॥ 11॥

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये
देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये ।
गङ्गास्तवमिमममलं नित्यं
पठति नरो यः स जयति सत्यम् ॥ 12॥
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गंगा सप्तमी पर करें मां गंगा स्तोत्रम का पाठ - फोटो : अमर उजाला
येषां हृदये गङ्गाभक्तिस्तेषां
भवति सदा सुखमुक्तिः ।
मधुराकान्तापज्झटिकाभिः
परमानन्दकलितललिताभिः ॥ 13॥

गङ्गास्तोत्रमिदं भवसारं
वाञ्छितफलदं विमलं सारम् ।
शङ्करसेवकशङ्कररचितं पठति
सुखी स्तव इति च समाप्तः ॥ 14॥

देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे ।
शङ्करमौलिविहारिणि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥
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