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Ganesh Chaturthi 2022 Puja: भगवान गणेश की पूजा में भूलकर भी न चढ़ाएं तुलसी की पत्तियां? होता है अशुभ

Fri, 26 Aug 2022 01:14 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Ganesh Chaturthi - फोटो : iStock
Ganesh Chaturthi 2022 Puja Rules: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणपति बप्पा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घर-घर में बप्पा की स्थापना की जाती है। 10 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव का ये पर्व बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म में गौरी पुत्र भगवान श्री गणेश को सुख, समृद्धि, वैभव, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी बुद्धि के भी देवता माने जाते हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा जरूर की जाती है। मान्यता है कि विधि पूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से वो भक्तों पर प्रसन्न होते हैं और सभी कष्टों को हर लेते हैं। गणेश उत्सव के दौरान लोग गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह की चीजें अर्पित करते हैं। हालांकि कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिन्हें भगवान गणेश की पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इन चीजों को चढ़ाने से गणपति बप्पा नाराज हो जाते हैं। इन्हीं चीजों में से एक है तुलसी की पत्तियां। आइए जानते हैं कि आखिर भगवान गणेश की पूजा में तुलसी की पत्तियां क्यों नहीं चढ़ानी चाहिए...
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गणेश जी की पूजा में क्यों वर्जित हैं तुलसी - फोटो : iStock
गणेश जी को न चढ़ाएं तुलसी की पत्तियां  
भगवान गणेश की पूजा में गलती से भी तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। कहा जाता है कि गणेश की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करने से भगवान गणेश नाराज हो जाते हैं और पूजा का शुभ फल नहीं मिलता है। 
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गणेश जी की पूजा में क्यों वर्जित हैं तुलसी - फोटो : iStock
गणेश जी की पूजा में क्यों वर्जित हैं तुलसी ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार गणेशजी गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे। इसी कालावधि में धर्मात्मज की कन्या तुलसी विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर निकली। देवी तुलसी सभी तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए गंगा के तट पर पहुंचीं। वहां पर देवी तुलसी ने देखा कि गणेश जी तपस्या में लीन थे। 

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गणेश जी की पूजा में क्यों वर्जित हैं तुलसी - फोटो : iStock
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार तपस्या में लीन भगवान गणेश रत्न जटित सिंहासन पर विराजमान थे। उनके समस्त अंगों पर चंदन लगा हुआ था। उनके गले में पारिजात पुष्पों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के अनेक हार पड़े थे। साथ ही उन्होंने सुगन्धित चंदन की माला धारण कर रखी थी। उनकी छवि बड़ी मनमोहक लग रही थी।
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गणेश जी की पूजा में क्यों वर्जित हैं तुलसी - फोटो : iStock
देवी तुलसी गणेश जी के इस सुंदर स्वरूप पर मोहित हो गईं और उनके मन में श्री गणेश से विवाह करने की इच्छा जाग्रत हुई। तुलसी ने विवाह की इच्छा से उनका ध्यान भंग किया। वहीं गणेश जी ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताकर तुलसी के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। विवाह प्रस्ताव ठुकराने पर तुलसी ने रुष्ट होकर गणेशजी को शाप दिया कि उनके एक नहीं बल्कि दो-दो विवाह होंगे। 
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गणेश जी की पूजा में क्यों वर्जित हैं तुलसी - फोटो : istock
इस पर भगवान गणेश नाराज हो गए और उन्होंने भी तुलसी को शाप दे दिया कि तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा। एक राक्षस की पत्नी होने का शाप सुनकर तुलसी ने गणेश जी से माफी मांगी। तब गौरी पुत्र गणेश ने तुलसी से कहा कि तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण राक्षस से होगा। किंतु फिर तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होने के साथ ही कलयुग में जगत के लिए जीवन और मोक्ष देने वाली होगी। पर मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। हिंदू धर्म में तब से ही भगवान श्री गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है।
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