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बदरीनाथ: कपाट खुलने से पहले जानिए भगवान विष्णु के इस धाम के बारे में 5 अनकही बातें

Mon, 30 Apr 2018 07:11 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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badrinath - फोटो : badrinath
सोमवार को भगवान बदीनाथ के कपाट आम दर्शनों के लिए खुल जाएंगे। इससे पहले भगवान विष्णु के धाम बदरीनाथ के बारे में जानिए कुछ अनकही बातें...
 
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- फोटो : amar ujala
सबसे पहले तो ये कि, बदीनाथ धाम के बारे में आज तक ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। सिर्फ वेदों में ही बदरीनाथ धाम का उल्लेख मिलता है। उत्तराखंड के चमोली जिले में नारायण पर्वत पर अलकनंदा नदी की गोद में यह मंदिर बना है। जहां गर्म पानी का कुंड (तप्त कुंड) है। जिसमें हमेशा गर्म पानी रहता है।
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Snowfall in badrinath - फोटो : amar ujala
बताया जाता है कि बदरीनाथ धाम के इस मंदिर से पहले राजा अशोका के शासन के दौरान यहां बौद्घ मंदिर हुआ करता था। इसके बाद गुरु शंकराचार्य ने नारद कुंड से भगवान बदरीनाथ की मूर्ति निकालकर यहां आठवीं सदी में इस मंदिर की स्थापना की थी। भगवान बदरीनाथ (श्री विष्णु) की मूर्ति काले पत्थर शालीग्राम से बनी हुई है और पदमासन में विराजमान है।

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badrinath
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने और खुलने के दिन रावल साड़ी पहन कर पार्वती का श्रृंगार करके ही गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। मान्यता यह कि उद्धव ही कृष्ण के बाल सखा है और उम्र में बड़े, इसलिए लक्ष्मी जी के जेठ हुए। हिन्दू परंपरा के अनुसार जेठ के सामने बहू नहीं आती है। इसलिए पहले जेठ बाहर आयेंगे तब लक्ष्मी को विराजा जाएगा।
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badrinath
धाम के मंदिर के गर्भगृह में भगवान की मूर्ति, मंडप में पूजा और सभा मंडप में भक्तों के दर्शन के लिए रखा जाता है। धाम में नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखंड दीप जलता है। यह दीप कभी नहीं बुझता है।
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badrinath aarti
बदरीनाथ धाम की आरती एक मुस्लिम ने लिखी है। आज से 152 साल पहले यह आरती बदरुद्दीन ने लिखी जिससे आज भी धाम में पूजा होती है। कपाट खुलने और बंद करने के दौरान इसी आरती से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
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