प्राचीन काल के कुछ सरोवर आज भी मौजूद हैं। जानें इन सरोवरों का ऐतिहासिक महत्व।
कैलाश मानसरोवर: इस सरोवर के बारे में कहा जाता है कि यहां माता पार्वती स्नान करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह सरोवर ब्रह्माजी मन से उत्पन्न हुआ था। इस सरोवर के पास ही कैलाश पर्वत है जो भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। बौद्ध धर्म में भी इसे पवित्र माना जाता है।
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इन पांच सरोवरों में स्नान करने से मिलता है मोक्ष
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नारायण सरोवर
नारायण सरोवरः गुजरात के कक्ष जिले के लखपत तहसील में स्थित यह सरोवर भगवान का विष्णु का सरोवर माना जाता है। भागवत पुराण में इस सरोवर की चर्चा है और यहां पर कई प्राचीन ऋषियों के आने के प्रसंग मिलते हैं।
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पंपा सरोवर
पंपा सरोवरः मैसूर के कंपी के निकट बसे अलेगुंदी गांव को रामायण कालीन किष्किधां माना जाता है। यहां से कुछ दूर आगे जाने पर पहाड़ों में कुछ जीर्णशीर्ण मंदिर और गुफाएं मिलती हैं जिनमें से एक सबरी गुफा है। कहा जाता है कि भगवान राम यहीं पर सबरी से मिले थे। यहीं पर सबरी के गुरु मतंग रिषि के नामका एक वन भी है।
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पुष्कर सरोवर
पुष्कर सरोवर: राजस्थान में अजमेर से 14 किमी दूरी पर स्थित इस सरोवर के पास भगवान ब्रह्मा जी ने स्वयं यज्ञ किया था। यहां पर ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ करने की भी बात कही जाती है। कथाओं में यह भी कहा गया है कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ के श्राद्ध यहीं पर किए थे।
बिंदु सरोवरः यहां पर प्राचीन काल में कर्दम ऋषि का आश्रम था। कर्दम ऋषि ने यहां पर 10 हजार वर्ष तपस्या किया था। यह अहमदाबाद से उत्तर में 130 किमी दूरी पर है। इसका वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है। कथाओं में कहा गया है कि यहां पर ऋषि परुशुराम ने अपनी मां का श्राद्ध किया था।