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Ekadashi 2022: कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व

Tue, 17 May 2022 12:20 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व - फोटो : अमर उजाला
Apara Ekadashi 2022: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक माह में दो एकादशी तिथि आती है। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इस तरह से पूरे वर्ष में 24 एकादशी तिथि होती है। प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। माह और तिथि के आधार पर प्रत्येक एकादशी का अलग-अलग महत्व होता है। ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। इस साल अपरा एकादशी का व्रत 26 मई 2022, दिन गुरुवार को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत नियम और निष्ठा से करने से सभी पापों का नाश होता है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। तो चलिए जानते हैं अपरा एकादशी व्रत का महत्व, तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में...

 
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कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व - फोटो : अमर उजाला
अपरा एकादशी 2022 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 मई दिन बुधवार को सुबह 10 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 26 मई दिन गुरुवार को सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर अपरा एकादशी का व्रत 26 मई को रखा जाएगा।
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कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व - फोटो : अमर उजाला
अपरा एकादशी 2022 पूजा मुहूर्त
इस बार अपरा एकादशी को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है। सुबह से लेकर रात 10 बजकर 15 मिनट तक आयुष्मान योग और उसके बाद सौभाग्य योग है। मान्यता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफलता प्रदान करने वाले होते। ऐसे में आप प्रात: काल स्नान आदि से निवृत होकर अपरा एकादशी व्रत की पूजा कर सकते हैं।

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कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व - फोटो : iStock
अपरा एकादशी महत्व
ज्योतिष के अनुसार, अपरा एकादशी अत्यंत पुण्यदायिनी है। पद्मपुराण के अनुसार, अपरा एकादशी का पुण्य व्यक्ति को पूरे जीवन के साथ मृत्यु के बाद भी प्राप्त होता है।
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कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व - फोटो : iStock
यदि कोई प्रेत योनि में है तो उसे मुक्ति प्राप्त होती है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इस व्रत के संबंध में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को बताया है कि ये व्रत बड़े-बड़े पापों का भी नाश करने वाला है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को करता है, उसे अपार धन प्राप्त होता है और उसे संसार में यश मिलता है। 
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कब है अपरा एकादशी व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व - फोटो : iStock
पूजा विधि 
  • इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन यदि आप व्रत रखते हैं तो प्रातः उठकर, स्नान से मुक्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें और एकादशी व्रत कथा पढ़ें और सुनें। यदि आप कथा करते या सुनते हैं तो आपको भगवान् विष्णु को पंचामृत और आटे की पंजीरी का भोग जरूर लगाना चाहिए। साथ ही विष्णु जी को लगने वाले भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
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