महाभारत के महायुद्ध में न सिर्फ वर्तमान भारत के राजा महाराजाओं ने भाग लिया था बल्कि दूसरे देशों के राजाओं ने भी भाग लिया था। इस महायुद्ध इतने सैनिक और योद्धा मारे गए थे कि जमीन लाल हो गई थी। इसलिए इसे धरती का प्रथम महायुद्ध भी कहा जाता है। इस युद्ध के पीछे कई कारण और कई लोग जिम्मेदार माने जाते हैं। युद्ध की बड़ी जिम्मेदारी कौरवों की है तो पांडवों को इससे पूरी तरह मुक्त नहीं किया जा सकता है। पांडव भी इस युद्ध के लिए कुछ हद तक जिम्मेदार थे यहां तक की पांडवों की पत्नी द्रौपदी भी इस युद्ध के लिए जिम्मेदार थी। यहां हम द्रौपदी की उन पांच बातों का जिक्र कर रहे हैं जिनकी वजह से महाभारत का महायुद्ध हुआ।
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अंधे का पुत्र अंधा
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दुर्योधन
द्रौपदी की पहली बात जिसने महाभारत युद्ध की ओर योद्धाओं को मोड़ दिया वह है दुर्योधन के लिए कहा गया एक वाक्य 'अंधे का पुत्र अंधा'। घटना उस समय कि है जब पांडवों ने इंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर के राज्याभिषे के समय कौरवों को इंद्रप्रस्थ में आमंत्रित किया तब एक दिन दुर्योधन मायावी महल में पानी में गिर गया। द्रौपदी दुर्योधन को गिरता हुआ देखकर हंसने लगी और व्यंग्य पूर्वक अंधे का पुत्र अंधा कह दिया। इससे दुर्योधन के मन में बदले की भावना भड़क उठी और परिणाम महाभारत का युद्ध हुआ।
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दुशासन की छाती का लहू मलूंगी
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द्रौपदी वस्त्रहरण
इंद्रप्रस्थ में अपमान के बाद दुर्योधन ने जुआ खलने के लिए युधिष्ठिर को हस्तिनापुर में आमंत्रित किया। यहां पांडव जुए में सब कुछ हार गए यहां तक की द्रौपदी भी दांव पर लग गई और दुर्योधन ने द्रौपदी का वस्त्रहरण करने का प्रयास किया। उस समय द्रौपदी ने कहा अब से मेरे बाल तब तक खुले रहेंगे जब तक मैं इनमें दुशासन की छाती का लहू नहीं मलूंगी। द्रौपदी की इस प्रतिज्ञा को पूरी करने की कसम भीम ने उठाई। द्रौपदी की यह प्रतिज्ञा भी महाभारत युद्ध की ओर एक कदम था।
तुम्हें अपने अपमान की याद दिलाती रहूंगी
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द्रौपदी
जब पांडव जुए में हार गए और वनवास जाने लगे तब द्रौपदी ने भी वन में पांडवों के साथ जाने का फैसला किया जबकि पांडव चाहते थे कि द्रौपदी महल में ही रहे। द्रौपदी ने उस समय कहा कि मैं तुम पांडवों के साथ ही रहूंगी और तुम्हें अपने अपमान की याद दिलाती रहूंगी ताकि तुम कौरवों से मेरे अपमान का बदला पूरा कर सको।
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मुंडन करके पांच चोटियां छोड दी जाए
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जयद्रथ
द्रौपदी की तीसरी बात जो महाभारत युद्ध का कारण बनी वह है जयद्रथ को पांच चोटियों वाला बनाकर जीवित छोड़ देने की सजा। यह घटना उन दिनों की है जब पांडव जुए में सबकुछ हारने के बाद 13 वर्ष का वनवास काट रहे थे। एक दिन दुर्योधन का जीजा जयद्रथ द्रौपदी का अपहरण करके अपने राज्य ले जाने लगा। पांडवों ने जयद्रथ को बंदी बना लिया और उसे मृत्यु दंड देने लगे। उस समय द्रौपदी ने पांडवों को ऐसा करने से रोक दिया और कहा कि 'जयद्रथ के सारे बाल काट लिए जाएं सिर्फ पांच चोटियां छोड दी जाए ताकि यह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे।' जयद्रथ इस घटना के बाद पांडवों से बदला लेने की ताक में लग गया जिसका परिणाम महाभारत के युद्ध में अभिमन्यु की हत्या के रूप में सामने आया।
एक कथा के अनुसार द्रौपदी कर्ण को पसंद करती थी लेकिन विवाह के समय अपने परिवार की मर्यादा और पिता की प्रतिज्ञा का ध्यान रखते हुए द्रौपदी ने यह कहते हुए कर्ण से विवाह करने से इंकार कर दिया कि वह सूत पुत्र है। कर्ण ने द्रौपदी के अपमान का बदला लेने के लिए जुए में जब पांडव द्रौपदी को हार गए तक यह कहा कि 'जो स्त्री पांच पुरुषों के साथ रहती है उसका मान क्या और अपमान क्या।' द्रौपदी ने कर्ण के इन शब्दों का बदला लेने के लिए अर्जुन को उकसाया और अंत में महाभारत के युद्ध में कर्ण को मारकर अर्जुन ने द्रौपदी का बदला पूरा किया। द्रौपदी के पिता ने द्रोणाचार्य की मृत्यु की प्रतिज्ञा ली थी जो अर्जुन के बिना संभव नहीं था इसलिए वह चाहते थे कि द्रौपदी का विवाह अर्जुन से हो।