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Devshayani Ekadashi 2023 Date : देवशयनी एकादशी व्रत आज, जानें महत्व और पूजा नियम

Thu, 29 Jun 2023 06:38 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Devshayani Ekadashi 2023 - फोटो : अमर उजाला
Devshayani Ekadashi 2023 Date: आज यानी 29 जून को देवशयनी एकादशी व्रत है। पंचांग अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार इन 4 महीनों में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। इसके बाद कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु की योग निद्रा पूर्ण होती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाता है। चतुर्मास में शादी विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते। चातुर्मास के दौरान पूजा-पाठ, कथा, अनुष्ठान से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। चातुर्मास में भजन,कीर्तन,सत्संग, कथा, भागवत के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी का महत्व, नियम पालन और व्रत पारण की तिथि के बारे में।
Devshayani Ekadashi 2023: देवशयनी एकादशी पर राशि अनुसार करें मंत्र जाप, हर मनोकामना होगी पूरी
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Devshayani Ekadashi 2023
देवशयनी एकादशी का महत्व 
देवशयनी एकादशी को सौभाग्यदायिनी एकादशी भी कहा जाता है। पद्म पुराण के अनुसार इस दिन व्रत या उपवास रखने से जाने-अनजाने में किए गए पाप भी नष्ट हो जाते हैं।  इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से मनोकामना भी पूरी होती है। 
शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है और चार महीने के लिए 16 संस्कार रुक जाते हैं। हालांकि पूजन,अनुष्ठान,मरम्मत करवाए गए घर में गृह प्रवेश,वाहन व आभूषण खरीदी जैसे काम किए जा सकते हैं। भागवत महापुराण के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को शंखासुर राक्षस मारा गया था। उस दिन से भगवान चार महीने तक क्षीर समुद्र में सोते हैं।

अन्य ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग दान के रूप में मांगे। भगवान ने पहले पग में पूरी पृथ्वी,आकाश और सभी दिशाओं को ढक लिया। अगले पग में पूरे स्वर्ग को ढक लिया। तब तीसरा राजा बलि ने अपने सिर पर रखवाया। इससे प्रसन्न होकर उन्होंने राजा बलि को पाताल लोक का अधिपति बना दिया और उससे वरदान मांगने को कहा। 

राजा बलि ने वर मांगते हुए कहा कि भगवान हमेशा मेरे महल में रहें। भगवान को बलि के बंधन में बंधा देखते हुए माता लक्ष्मी ने बलि को भाई बनाया और भगवान को वचन से मुक्त करने का अनुरोध किया। माना जाता है तब से भगवान विष्णु का अनुसरण करते हुए तीनों देव 4-4 महीने में पाताल में निवास करते हैं। श्री हरि विष्णु देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक, शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक पाताल में निवास करते हैं।।
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Devshayani Ekadashi 2023 - फोटो : lord vishnu
एकादशी व्रत के नियम पालन
  • एकादशी पर सुबह जल्दी उठें। घर की साफ-सफाई और नित्य कर्म से निवृत्त हो जाएं। घर में गंगाजल छिड़क कर घर आंगन को पवित्र करें। इसके बाद माता- पिता व घर के बड़े- बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद ले।
  • भगवान श्रीहरि की पूजा उपासना करें, उनको मेवा- फल इत्यादि का भोग लगाएं।
  • किसी पास के मंदिर में जाकर भगवान श्री हरि के विग्रह का दर्शन करें। उन्हें फल- पुष्प- तुलसी अर्पित करें।
  • एकादशी के दिन भगवान के समक्ष व्रत-उपवास का संकल्प करें, इस दिन किसी भी प्रकार का अन्न ध्यान नहीं करना चाहिए। और आहार में केवल फल- सब्जियां- दूध इत्यादि का सेवन करें।
  • इस दिन श्री हरि की कथाओं भगवत गीता, श्रीरामचरितमानस आदि का श्रवण करें। भगवान श्रीहरि के मंत्रों व नाम का जप करें। अधिक से अधिक मौन का पालन करें।

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Devshayani Ekadashi 2023 - फोटो : अमर उजाला
एकादशी के दिन क्या करें क्या न करें  
  • आप एकादशी का व्रत रखते हैं तो बहुत अच्छी बात है,यदि आप एकादशी का व्रत नहीं भी रखते तो भी आप से निवेदन है की एकादशी तिथि के दिन आप तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज और शराब आदि का पूरी तरह त्याग करें। 
  • एकादशी तिथि के दिन चावल खाना भी निषेध है अतः इस दिन चावल भी नहीं खाना चाहिए।।
  • एकादशी तिथि के दिन दान-पुण्य करें, बुजुर्गों की सेवा करें,गाय को गुड़ हरा चारा इत्यादि खिलाएं, ऐसा करने से श्रेष्ठ पुण्यों की प्राप्ति होती है।।
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Devshayani Ekadashi 2023 - फोटो : iStock
एकादशी पर करें इन मंत्रों का जाप

विष्णु मूल मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय॥

भगवते वासुदेवाय मंत्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥ 

विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
 
श्री विष्णु मंत्र
मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः।
मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥
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Devshayani Ekadashi 2023 - फोटो : iStock
विष्णु स्तुति
शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम् ।
लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम् ॥
यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे: ।
सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा: ।
ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो
यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम: ॥
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Devshayani Ekadashi 2023 - फोटो : Social Media
देवशयनी एकादशी व्रत की पारण तिथि 
30 जून, शुक्रवार को प्रातः 8:23 से प्रातः 10:04 तक किया जाएगा।
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