Kamada Ekadashi Vrat 2022
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पुण्यों की प्राप्ति के लिए
पुराणों में शालिग्राम को ब्रह्माण्डभूत श्री नारायण का प्रतीक माना जाता है। पदमपुराण के अनुसार जो शालिग्राम का दर्शन करता,उसे मस्तक झुकाता,स्न्नान कराता और पूजन करता है,वह कोटि यज्ञों के समान पुण्य तथा कोटि गोदानों का फल पाता है। इनके स्मरण,कीर्तन,ध्यान,पूजन और प्रणाम करने पर अनेक पाप दूर हो जाते हैं। जिस स्थान पर शालिग्राम और तुलसी होते हैं,वहां भगवान श्री हरि विराजते हैं और वहीं सम्पूर्ण तीर्थों को साथ लेकर भगवती लक्ष्मी भी निवास करती हैं। पदमपुराण के अनुसार जहां शालिग्राम शिलारूपी भगवान केशव विराजमान हैं,वहां सम्पूर्ण देवता,असुर,यक्ष तथा चौदह भुवन मौजूद हैं। जो शालिग्राम शिला के जल से अपना अभिषेक करता है,उसे सम्पूर्ण तीर्थों में स्न्नान के बराबर और समस्त यज्ञों को करने समान ही फल प्राप्त होता है।