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मां का निवास स्थान है यहां, साल भर लगा रहता है तांत्रिकों का ताता

Sat, 05 Oct 2019 10:38 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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kali temple
पूरी दुनिया में देवी भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मुख्य रूप से मां काली की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कोलकाता मां काली का निवास स्थान है और उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम कोलकाता पड़ा। कोलकाता में मां के 2 प्रसिद्ध मंदिर हैं। आज हम आपको संक्षपित में इन मंदिरो के बारें में बताते हैं। 
 
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छोटी काली जी मंदिर - फोटो : amar ujala
दक्षिणेश्वर काली मंदिर 
दक्षिणेश्वर काली मंदिर हुगली नदी के तट पर बसा है और यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से हैं। मान्यताओं के अनुसार जब विष्णु भगवान ने मां सती के शव के टुकड़े किए थे तब इस स्थान पर माता की दाएं पांव की चार उंगलियां गिरी थीं। इस मंदिर को मां काली का दिव्य धाम भी कहा जाता है।  भक्तों के लिए यह स्थान किसी सिद्ध स्थान से कम नहीं है। भारत के महानतम देवी तीर्थों में दक्षिणेश्वर काली मंदिर की गणना की जाती हैं।


 
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काली
दक्षिणेश्वर काली मंदिर दो मंजिला मंदिर है और नौ गुंबदों पर बना हुआ है। इन गुंबदों पर खड़े लगभग सौ फीट ऊंचे मंदिर के गर्भगृह में मां काली की सुंदर मूर्ति है और यहां काली मां की मूर्ति लेटे हुए भगवान शिव की छाती पर खड़ी है। 

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काली
कालीघाट मंदिर 
कालीघाट मंदिर कोलकाता में काली मां का दूसरा सिद्ध मंदिर है। यहां की काली प्रतिमा मुख काले पत्थरों से निर्मित है। जिह्वा, हाथ और दांत सोने से मढ़े हुए हैं। यह जगह काली मां के भक्तों के लिए सबसे बड़ा मंदिर है।

 
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tantrik
इन मंदिरो में तांत्रिको का लगा रहता है ताता
कोलकाता के ये दोनों मंदिर तांत्रिकों के लिए काफी महत्वपूर्ण तीर्थ है और उनका यहां साल भर आना-जाना लगा रहता है। यहां सैकड़ों तांत्रिक पूरे भारत से आ कर काली मां की पूजा करते हैं। 
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