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Chaturthi Shradh 2025: चतुर्थी तिथि का श्राद्ध कब करें, 10 या 11 सितंबर? जानिए सही तिथि, दिन और शुभ समय

Tue, 09 Sep 2025 12:31 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chaturthi Shraddh 2025: चतुर्थी श्राद्ध की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि अलग-अलग पंचांग 10 और 11 सितंबर दोनों को यह तिथि बता रहे हैं। ऐसे में सही दिन पर श्राद्ध करना आवश्यक हो जाता है, ताकि विधि-विधान का पालन ठीक से हो और पूर्वजों को संतोष मिले।
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चतुर्थी श्राद्ध 2025 - फोटो : अमर उजाला
Chaturthi Shradh Kab Hai 2025:  पितृपक्ष जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, सनातन धर्म में एक अत्यंत पुण्यकाल माना जाता है। यह अवधि उन पूर्वजों को समर्पित होती है जो इस लोक से परलोक गमन कर चुके हैं। ऐसा विश्वास है कि पितृ पक्ष के दौरान विधिपूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। हर दिन किसी न किसी तिथि के अनुसार विशेष श्राद्ध होता है, जो पितरों की मृत्यु तिथि के आधार पर किया जाता है।
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वर्ष 2025 में पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है। इस बार चतुर्थी श्राद्ध की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि अलग-अलग पंचांग 10 और 11 सितंबर दोनों को यह तिथि बता रहे हैं। ऐसे में सही दिन पर श्राद्ध करना आवश्यक हो जाता है, ताकि विधि-विधान का पालन ठीक से हो और पूर्वजों को संतोष मिले। आइए जानते हैं कि पंचांग के अनुसार चतुर्थी श्राद्ध की सही तारीख क्या है।
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पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है 10 सितंबर 2025 को दोपहर 03:37 बजे, और इसका समापन 11 सितंबर 2025 को दोपहर 12:45 बजे होगा।
चतुर्थी श्राद्ध 2025 कब है? 
इस साल चतुर्थी श्राद्ध बुधवार, 10 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह तिथि तीसरे श्राद्ध के साथ ही पड़ रही है, इसी वजह से लोगों में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है 10 सितंबर 2025 को दोपहर 03:37 बजे, और इसका समापन 11 सितंबर 2025 को दोपहर 12:45 बजे होगा।
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चतुर्थी श्राद्ध 2025 का शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
चतुर्थी श्राद्ध 2025 का शुभ मुहूर्त 
कुतुप मुहूर्त:  प्रातः 11:53 से दोपहर 12:43 तक
कुल अवधि- 50 मिनट
 
रौहिण मुहूर्त:  दोपहर 12:43 से दोपहर 01:33 तक 
कुल अवधि- 50 मिनट
अपराह्न काल मुहूर्त: दोपहर 01:33 से सायं  04:02 तक 
कुल अवधि -2 घंटे 30 मिनट

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पितृ पक्ष के चौथे दिन किसका श्राद्ध किया जाता है? - फोटो : freepik
पितृ पक्ष के चौथे दिन किसका श्राद्ध किया जाता है?
पितृ पक्ष हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण समय होता है, जब लोग अपने पितरों यानी पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। पितृ पक्ष में प्रत्येक तिथि किसी विशेष श्राद्ध के लिए निर्धारित होती है।
पितृ पक्ष के चौथे दिन, यानी चतुर्थी तिथि को उन दिवंगत आत्माओं का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन किसी भी मास की चतुर्थी तिथि को हुआ हो चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो या शुक्ल पक्ष की। इस दिन किया गया श्राद्ध "चतुर्थी श्राद्ध" या "चौथ श्राद्ध"  के नाम से जाना जाता है।
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चतुर्थी श्राद्ध करने का विधान श्राद्ध पक्ष के चतुर्थ दिन किया जाता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी महीने में हुई हो। - फोटो : freepik
चतुर्थी श्राद्ध की विशेषता
  • यह श्राद्ध उन सभी पितरों के लिए होता है जिनकी मृत्यु तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी रही हो।
  • चतुर्थी श्राद्ध करने का विधान श्राद्ध पक्ष के चतुर्थ दिन किया जाता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी महीने में हुई हो।
  • इस दिन श्रद्धालु श्रद्धा, नियम और विधिपूर्वक तर्पण, पिंडदान, और ब्राह्मण भोजन कराते हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों को तृप्त करता है और उनकी आत्मा को शांति और गति प्रदान करता है।
  • साथ ही, घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।
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गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में श्राद्ध कर्म का विशेष उल्लेख है। - फोटो : adobe stock
श्राद्ध से जुड़ी धार्मिक मान्यता
पितृपक्ष के 15 दिनों को हमारे पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। इस समय यह विश्वास किया जाता है कि पितृलोक से हमारे पितर (पूर्वज) धरती पर आते हैं। उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए लोग श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना, दक्षिणा देना और वस्त्र दान करना पुण्य का कार्य माना जाता है। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं। गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में श्राद्ध कर्म का विशेष उल्लेख है। इन ग्रंथों के अनुसार यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो श्राद्ध अमावस्या (सर्वपित्र अमावस्या) को किया जा सकता है, लेकिन यदि तिथि ज्ञात हो, तो उसी तिथि को श्राद्ध करना अधिक फलदायक माना गया है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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