गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में श्राद्ध कर्म का विशेष उल्लेख है।
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श्राद्ध से जुड़ी धार्मिक मान्यता
पितृपक्ष के 15 दिनों को हमारे पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। इस समय यह विश्वास किया जाता है कि पितृलोक से हमारे पितर (पूर्वज) धरती पर आते हैं। उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए लोग श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना, दक्षिणा देना और वस्त्र दान करना पुण्य का कार्य माना जाता है। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं। गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में श्राद्ध कर्म का विशेष उल्लेख है। इन ग्रंथों के अनुसार यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो श्राद्ध अमावस्या (सर्वपित्र अमावस्या) को किया जा सकता है, लेकिन यदि तिथि ज्ञात हो, तो उसी तिथि को श्राद्ध करना अधिक फलदायक माना गया है।
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