आचार्य चाणक्य
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विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्र गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्र धर्मो मित्रं मृतस्य।।
ज्ञान
आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से पहली चीज बताते हैं ''ज्ञान'' चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति परदेस में अपनों से दूर है उसके लिए ज्ञान ही सबसे बड़ा और सच्चा मित्र है। ज्ञान ही एक ऐसी चीच है जो व्यक्ति का आखिरी समय तक साथ निभाता है। ज्ञान के बल पर व्यक्ति हर परिस्थिति को पार करने में सक्षम रहता है।