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Bhadrapada Purnima 2020: जानें क्या है महत्व, शुभ मुहूर्त और व्रत की विधि

Wed, 26 Aug 2020 01:59 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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भादप्रद पूर्णिमा 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social Media
सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का बहुत महत्व माना गया है। इस तिथि को पुण्य फलदायक माना जाता है, यह तिथि भगवान सत्यनारायण को समर्पित की जाती है। पूर्णिमा तिथि की रात चंद्रमा अपने पूरे स्वरुप में होता है। हर माह पूर्णिमा तिथि पड़ती है, इस तरह से  पूरे वर्ष में 12 पूर्णिमा आती हैं। पूर्णिंमा तिथि के आधार पर ही हिंदी कैलेण्डर के माह बदलते हैं, इसलिए हर माह के नाम पर पूर्णिमा तिथि का नाम होता है, इसी तरह से भादप्रद मास की पूर्णिमा को भादप्रद पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा पूर्वभाद्र, उत्तरभाद्र नक्षत्र में रहता है। जानते हैं भादप्रद पूर्णिमा का महत्व, तिथि और व्रत विधि..
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भादप्रद पूर्णिमा 2020 महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व
इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से व्यक्ति को धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। जो लोग पूर्णिमा के दिन व्रत करते हैं, उनके घर में सब प्रकार से सुख-समृद्धि का वास होता है। सारें कष्ट दूर होते हैं। इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है। माना जाता है कि भगवान सत्यनारायण नें भी इस व्रत को किया था। इस दिन दान-स्नान का भी बहुत महत्व माना गया है। भादप्रद पूर्णिमा के दिन को इसलिए भी खास माना गया है क्योंकि इस दिन से श्राद्ध पक्ष का आरंभ होता है, और सोलह दिनों तक अपने पितरों से आशीर्वाद  प्राप्त करने के दिन होते हैं।  
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भादप्रद पूर्णिमा 2020 तिथि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भादप्रद पूर्णिमा तिथि और समय

1 सितंबर 2020 को सुबह 09:38 मिनट से पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी।
2 सितंबर 2020 को सुबह 10:53 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त।
 
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भादप्रद पूर्णिमा 2020 व्रत विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इस तरह से करना चाहिए भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन जल्दी प्रातःकाल के समय उठें स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद सबसे पहले पूजा घर की साफ-सफाई करें। अगर किसी पटरी पर प्रतिमा स्थापित करनी है तो पहले उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं, फिर भगवान सत्नारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान सत्नारायण की पूजा में पंचामृत अवश्य बनाएं। प्रसाद में चूरमा बनाएं, विधिवत् पूजा करें और सत्यनारायण व्रत की कथा सुनें, इसके बाद सत्यनारायण भगवान के साथ शिव जी, माता लक्ष्मी, मां पार्वती की आरती करें। उसके बाद सभी को प्रसाद दें, और पूरे दिन उपवास करें।
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