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ज्येष्ठ माह की पहली एकादशी कब है? जानें सही तिथि, पूजा मुहूर्त, दान और पारण का समय

Wed, 06 May 2026 08:51 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अपरा एकादशी व्रत से सुख, समृद्धि और संपन्नता मिलती है। जानें 2026 में अपरा एकादशी की तिथि, व्रत का दिन और पूजा का शुभ मुहूर्त।
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अपरा एकादशी 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
Apara Ekadashi 2026 Shubh Muhurat: हिंदू परंपरा में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है, जिसे हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में दो बार रखा जाता है। प्रत्येक एकादशी का अपना अलग महत्व और नाम होता है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है जो विशेष रूप से सुख-समृद्धि और वैभव प्रदान करने वाली मानी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं 2026 में अपरा एकादशी कब है और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
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अपरा एकादशी तिथि - फोटो : Adobe Stock
अपरा एकादशी तिथि 
  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ:  12 मई, दोपहर 2: 52 मिनट पर 
  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई,दोपहर 1:29 मिनट पर 
  • उदयातिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा।
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अपरा एकादशी शुभ मुहूर्त - फोटो : Adobe Stock
अपरा एकादशी शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:37 से प्रातः 05:21 
  • अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 02:45 से दोपहर 03:37
  • गोधूलि मुहूर्त- सायं 07:04 से सायं  07:26 
  • अमृत काल- सायं 07:41 से रात्रि 09:13 

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अपरा एकादशी पारण का समय - फोटो : Adobe Stock
अपरा एकादशी पारण का समय
अपरा एकादशी का पारण 14 मई 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए  14 मई, प्रातः  6:04 मिनट से प्रातः 08:41 मिनट का समय सबसे उत्तम रहेगा। 
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अपरा एकादशी व्रत का महत्व - फोटो : Adobe Stock
अपरा एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से वही फल प्राप्त होता है, जो कार्तिक माह में पवित्र स्नान करने या गंगा तट पर पितरों के लिए पिंडदान करने से मिलता है। इसके साथ ही, गोमती नदी में स्नान, कुंभ के दौरान केदारनाथ धाम के दर्शन, बद्रिकाश्रम में निवास और सूर्य-चंद्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्नान करने के समान पुण्य भी इस व्रत से मिलता है। इसलिए अपरा एकादशी को विशेष रूप से मोक्ष और समृद्धि प्रदान करने वाली एकादशी माना गया है।
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अपरा एकादशी पूजा विधि

  • प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ-सुथरे, संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।
  • व्रत और पूजा की शुरुआत से पहले श्रद्धा के साथ संकल्प लें।
  • घर में एक साफ स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें।
  • भगवान विष्णु का जल या पंचामृत से अभिषेक करें।
  • उन्हें गोपी चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करें।
  • पूजा में तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं, इसे बहुत शुभ माना जाता है।
  • भोग के रूप में पंचामृत और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें।
  • अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें।
  • अंत में श्रद्धा भाव से भगवान की आरती करें।
  • व्रत का पारण द्वादशी तिथि में शुभ समय पर करें।
  • पूरे दिन सात्विक रहें और तामसिक भोजन व विचारों से दूर रहें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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