Amarnath Yatra 2019: इस साल अमरनाथ की पवित्र यात्रा की शुरुआत1 जुलाई से होने वाली है। यह यात्रा कुल मिलाकर 46 दिनों तक चलेगी। अमरनाथ की पवित्र यात्रा का पहला जत्था 1 जुलाई को निकलेगा। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए लोगों के मन में गहरी आस्था रहती है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भोले के भक्त बाबा के दर्शन करने से पीछे नहीं हटते हैं। आखिरकार ऐसा क्या है कि हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग अमरनाथ की यात्रा करना चाहते है। क्या है इस अमरनाथ गुफा का रहस्य आइए जानते हैं।
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फाइल फोटो- अमरनाथ यात्रा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ की गुफा वह स्थान है जहां पर भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी। ऐसा माना जाता है कि आज भी इस गुफा में भगवान शिव और माता पार्वती साक्षात विराजमान हैं।
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फाइल फोटो- अमरनाथ यात्रा
महादेव माता पार्वती को अमर कथा सुनाने से पहले एक ऐसे स्थान को चुनना चाहते थे जहां पर कोई भी जीवित प्राणी न हो इसके लिए उन्होंने अमरनाथ की गुफा को चुना। अमरनाथ गुफा में प्रवेश करने से पहले उन्होंने बारी-बारी से अपने साथ रहने वाले सारे गणों का त्याग किया।
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फाइल फोटो- अमरनाथ यात्रा
सबसे पहले भगवान शिव ने अपने नंदी का त्याग किया। जहां पर उन्होंने नंदी को छोड़ा उसे पहलगाम जाता है। अमरनाथ गुफा की यात्रा यहीं से आरम्भ होती है। इसके बाद अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया था। जहां पर चंद्रमा का त्याग किया वह चंदनवाणी कहलाती है।
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फाइल फोटो- अमरनाथ यात्रा
इसके बाद भगवान शंकर ने गले में धारण सांपों को छोड़ा। यह स्थान शेषनाग कहलाई गई। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, महादेव ने जहां पिस्सू नामक कीडे़ को त्यागा, वह जगह पिस्सू घाटी है।
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फाइल फोटो- अमरनाथ यात्रा
सभी का त्याग कर जब भोलेनाथ माता पार्वती संग अमरनाथ की गुफा में प्रवेश किया और माता पार्वती को अमरकथा सुनानी आरम्भ कर दी। कहा जाता है कथा सुनने-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई। अमर कथा सुनाते समय भगवान भोले लीन हो गए और उन्हें इस बात का एहसास नहीं हुआ की माता पार्वती सो गईं।
वहां पर दो कबूतरों को जोड़ा मौजूद था जो यह कथा सुना रहा था और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। महादेव को लगा पार्वती कथा सुन रही हैं। अमरकथा सुनने से कबूतर अमर हो गए। गुफा में आज भी कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है। मान्यता है कि आज भी इन दो कबूतरों के दर्शन भक्तों को होते हैं।