आज से पवित्र अमरनाथ यात्रा की शुरूआत होने जा रही है। करीब 4000 तीर्थयात्रियों के साथ पहला जत्था रवाना हो चुका है। जो अगले चालीस दिनों तक चलेगी। 7 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा यानि रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। आइए जानते हैं इस अमरनाथ गुफा से जुड़े कुछ रहस्यों के बारें में।
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अमरनाथ की गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनाई थी। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं।
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भगवान शिव जब माता पार्वती को अमरकथा सुनाने जा रहे थे तो उन्होनें पहलगाम में अपने नंदी का त्याग किया था। चंदनबाडी में अपनी जटा से चंदमा को मुक्त किया।
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गले में पहनें अपने सांपों को शेषनाग नामक झील में उतारा दिया था। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया,फिर पंचतरणी में पांचों तत्वों का त्याग किया था।
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भगवान शिव जब माता पार्वती को अमरकथा सुना रहें थे तो उसी समय पार्वतीजी को नींद आ गई थीं। इस दौरान कबूतरों का एक जोड़ा भी इस कथा को सुन रहा था जिसके कारण वह भी अमर हो गया। गुफा में आज भी यह कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है।
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ऐसी मान्यता है कि इस गुफा का खोज बूटा मालिक नाम का एक गड़रिए ने थीं। भेडें चराने के दौरान बर्फीले वीरान इलाके में उसकी मुलाकात एक साधु से थी तब साधु ने उसे कोयले से भरी एक बोरी दी थी। बाद में घर पहुंचने पर सोने में बदल गई। आज भी बूटा मालिक के वंशजो को चढ़ावे का एक हिस्सा दिया जाता है।
ऐसी मान्यता है की रक्षा बंधन की पूर्णिमा के दिन भगवान शंकर इस अमरनाथ गुफा में आते है और रक्षा बंधन के दिन ही छड़ी मुबारक को भी शिवलिंग के पास स्थापित कर दी जाती है।