इस साल का दूसरा और इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण आज पड़ेगा। यह रात 11.54 बजे से शुरू होकर अगले दिन 28 जुलाई तड़के 3.49 बजे तक रहेगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण 1.48 घंटे तक बना रहेगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखेगा। इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। इस चंद्र ग्रहण को पूरे देश में देखा जा सकेगा। इसके बाद 9 जून 2123 में इतना लंबा चंद्र ग्रहण पड़ेगा। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 31 जनवरी को पड़ा था।
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- फोटो : amar ujala
इस ग्रहण का सूतक आज दिन में 02 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगा। रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट पर ग्रहण लगना प्रारंभ होगा। ग्रहण का मध्य 28 जुलाई की रात्रि में 01 बजकर 52 मिनट पर होगा। रात्रि में 01 बजे से 02 बजकर 43 मिनट तक चंद्रमा लुप्तप्राय: रहेगा। ग्रहण की समाप्ति मध्य रात्रि उपरांत 03 बजकर 49 मिनट पर होगी।
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ग्रहण के सूतक में (रोगी, वृद्ध एवं बच्चों को छोड़कर) भोजन एवं शयन नहीं करना चाहिए। ग्रहण प्रारंभ से पूर्व स्नान, मध्य में हवन, अंत में दान और ग्रहण समाप्त होने पर वस्त्र सहित स्नान एवं बिम्ब के दर्शन करना शास्त्रानुकूल रहता है। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को धारदार चाकू, छुरी, कैंची, सुई, नुकीली वस्तु आदि का प्रयोग नहीं करना चहिए। साड़ी या चुनरी के पल्ले को गेरू से रंगकर धारण करने पर गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
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यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा, अभिजित् व श्रवण नक्षत्र मकर राशि पर होगा। निर्णय सिंधु अनुसार मकर राशि एवं उक्त नक्षत्र वालों के लिए ग्रहण प्रतिकूल रहेगा। चर राशि मकर में वक्री मंगल की स्थिति तथा चंद्रमा से मंगल की अंशात्मक निकटता वर्षा की अधिकता, बाढ़, भूकंप, रेल, यान, खान दुर्घटना आदि करा सकती है।
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रक्त चाप एवं हृदय रोगियों को आगामी छह माह तक स्वास्थ्य का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। मेष, सिंह, कन्या, वृश्चिक एवं मीन राशि के लिए ग्रहण श्रेष्ठ रहेगा। वृष, कर्क, धनु राशि के लिए मध्यम तथा मिथुन, तुला, मकर, कुंभ राशि के लिए ग्रहण फल नेष्ट रहेगा। ग्रहण के अशुभ फल निवृत्ति हेतु ग्रहण काल में ग्रह शांतिपाठ, अपने इष्ट का स्मरण, गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप, दान आदि करना अनिष्ट निवारक रहता है।
इस दिन घरों में घुईयां की सब्जी और बेड़ही (रोटी में चना भरकर) बनाई जाती है और उसे आम के साथ खाने की प्रथा है। आषाढ़ी पूर्णिमा से आम की फसल खत्म मानी जाती है। इस कारण इस दिन आम गुरु का पूजन करें यदि आपका कोई गुरु है तो इस दिन उनके पूजन का विधान है। यदि कोई गुरु नहीं है तो अपने ईष्ट को ही गुरु मानकर पूजन कर सकते हैं।