बांके बिहारी मंदिर
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स्वामी हरिदास जी की भक्ति से जुड़ी परंपरा
वृंदावन स्थित बांके बिहारी जी के मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन चरण दर्शन की परंपरा एक बहुत ही पुरानी और भावनात्मक कथा से जुड़ी हुई है। यह परंपरा स्वामी हरिदास जी की भक्ति से उत्पन्न हुई, जो भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त थे। स्वामी हरिदास जी का जीवन पूरी तरह से भगवान की सेवा, भक्ति और प्रेम से ओत-प्रोत था। उनके भजन और संगीत ने न केवल वृंदावन बल्कि सम्पूर्ण भारत में कृष्ण भक्ति की गहरी धारा बहाई।
एक बार स्वामी जी को भगवान से सेवा के लिए कुछ धन की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने प्रभु से विनम्रता से प्रार्थना की और उसी रात उनके ध्यान में भगवान के चरणों के पास एक स्वर्ण मुद्रा प्रकट हुई। यह देख स्वामी जी ने भगवान के चरणों में संपूर्ण श्रद्धा और समर्पण का अनुभव किया। यही अनुभव उनके जीवन का एक निर्णायक मोड़ बना, और तभी से उन्होंने यह मान लिया कि भगवान के चरणों में न केवल दिव्यता है, बल्कि वहां से सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होते हैं।
स्वामी हरिदास जी की भक्ति के बाद, यह मान्यता फैल गई कि जब भी भक्तों को सेवा या भोग के लिए धन की आवश्यकता होती है, तो उन्हें भगवान के चरणों से स्वर्ण मुद्रा प्राप्त होती थी। इस घटनाक्रम ने भगवान के चरणों को एक विशेष महत्व दे दिया और साथ ही यह परंपरा भी जन्मी कि भगवान के चरण केवल अक्षय तृतीया के दिन ही प्रकट होंगे, ताकि भक्तों के जीवन में अमूल्य आशीर्वाद और पुण्य का वास हो सके।