हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। इसे अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष ये व्रत 28 अक्तूबर दिन गुरुवार को पड़ रहा है। इस व्रत में अहोई माता के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। इस दिन माताएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और रात को तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करती हैं। इस दिन माताएं माता पार्वती के अहोई स्वरूप की अराधना करती हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन निर्जल उपवास करती हैं। शाम के समय आकाश में तारे देखने और अर्घ्य देने के बाद महिलाएं व्रत का पारण करती हैं।
जैसा कि सब जानते हैं कि अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और संतान सुख के लिए करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा कुंड है जिसमें यदि पति और पत्नि दोनों अहोई अष्टमी के दिन स्नान कर लें तो उन्हें शीघ्र ही संतान प्राप्ति होती है। चलिए जानते हैं क्या है राधा कुंड की पौराणिक मान्यता।