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Astro Tips: इन उपायों को करने से पूरे होंगे सभी बिगड़े काम, मिलेगी तरक्की

Thu, 01 May 2025 04:47 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करने से सभी मनोकामना पूरी होती हैं। इस दौरान आप हनुमान मंदिर में एक नारियल के ऊपर कलावा, फूल और सिंदूर रखकर उसे प्रभु को अर्पित कर दें। 
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Powerful Astrology Remedies - फोटो : freepik
Powerful Astrology Remedies: जीवन में हर व्यक्ति आगे बढ़ने का प्रयास करता है, इसके लिए वह दिन रात मेहनत कर अपने लक्ष्यों को भी पूरा करता है। इस दौरान कुछ शिक्षा, तो कुछ नौकरी-व्यवसाय में लगातार परिश्रम करते है। लेकिन कई बार कुछ काम को पूरा करने में बार-बार बाधाएं आने लगती है, जिस कारण मन उदास और नकारात्मक विचारों से भर जाता है। ऐसे में कुछ उपाय करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है। इन उपायों के प्रभाव से आप मनचाही सफलता व तरक्की पा सकते हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।
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Powerful Astrology Remedies - फोटो : adobe stock
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करने से सभी मनोकामना पूरी होती हैं। इस दौरान आप हनुमान मंदिर में एक नारियल के ऊपर कलावा, फूल और सिंदूर रखकर उसे प्रभु को अर्पित कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने पर आपको अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
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Powerful Astrology Remedies - फोटो : Adobe Stock
  • आप रविवार के दिन भगवान सूर्य को जल अर्पित करें, साथ ही सूर्य नमस्कार करें। मान्यता है कि ऐसा करने पर करियर में सफलता प्राप्त होती हैं। इसके अलावा व्यक्ति का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

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Powerful Astrology Remedies - फोटो : Adobe stock
  • ज्योतिषियों के मुताबिक लगाार 43 दिनों तक आप गुड़ और गेहूं का दान करें। ऐसा करने पर व्यक्ति के सभी बिगड़े काम बन सकते हैं।
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Powerful Astrology Remedies - फोटो : Freepik
  • किसी भी नए काम की शुरुआत व किसी परीक्षा देने से पहले आप पशु-पक्षियों को रोटी खिलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने पर कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
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Powerful Astrology Remedies - फोटो : Adobe Stock
  • आप रोजाना सूर्य चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इससे जातक के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जिसके प्रभाव से सभी काम मनचाहे तरीकों से पूरे होते हैं।

श्री सूर्य चालीसा
 दोहा
 
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
 
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
 
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
 
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
 
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
 
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
 
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
 
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
 
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
 
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
 
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
 
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
 
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
 
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
 
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
 
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
 
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
 
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
 
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
 
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
 
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
 
दोहा
 भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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