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Mahakumbh 2025: महाकुंभ में सुधा मूर्ति ने भी पितरों का किया तर्पण, जानें क्यों जरूरी है इसे करना?

Fri, 24 Jan 2025 09:49 AM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kumbh Mela 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा। अब हाल ही में,  इंफोसिस फाउंडेशन के संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति महाकुंभ में संगम स्नान के लिए पहुंची हैं और पितरों का तर्पण किया है।
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सुधा मूर्ति - फोटो : PTI
 
Sudha Murthyइस साल, महाकुंभ 2025 उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम स्थल संगम पर शुरू हुआ। सभी कुंभों में सबसे बड़ा महाकुंभ 144 साल बाद हो रहा है, जिसमें प्रयागराज पवित्र उत्सव की मेजबानी कर रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा। अब हाल ही में इंफोसिस फाउंडेशन के संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति महाकुंभ में संगम स्नान के लिए पहुंची हैं और पितरों का तर्पण किया है।
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सुधा मूर्ति - फोटो : PTI
त्रिवेणी संगम में लगाई डुबकी
21 जनवरी को प्रयागराज कुंभ पहुंचकर सुधा मूर्ति ने  पवित्र त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाई। सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। बता दें कि सुधा मूर्ति पद्म भूषण से सम्मानित हैं। वह  राजनीति, समाजसेवा और व्यापार जगत में जाना माना नाम है। सुधा मूर्ति अपने सरल स्वभाव और व्यक्तित्व के लिए जानी जाती हैं।


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सुधा मूर्ति - फोटो : PTI
इस्कॉन शिविर में परोसा महाप्रसाद
महाकुंभ पहुंचकर सुधा मूर्ति ने अपना अनुभव साझा किया और इसे जिंदगी में मिलने वाला एकमात्र अवसर कहा है। इसके अलावा सुधा ने कहा, ‘यह तीर्थराज सर्वोत्तम पवित्र स्थल है। महाकुंभ 144 वर्षों में एक बार आता है और मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।' महाकुंभ की तीन दिवसीय यात्रा पर सुधा मूर्ति ने प्रयागराज में इस्कॉन शिविर में महाप्रसाद परोसने में मदद की। हरे रंग की साड़ी पहने और कंधों पर काला बैग लिए, सुधा मूर्ति भोजन काउंटर पर खड़ी होकर महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं को रोटियां बांटती नजर आईं।

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-फोटो 57 : महाकुंभ में स्नान करते विहिप जिलाध्यक्ष व अन्य। स्रोत स्वयं
क्यों जरूरी है पितरों का तर्पण
महाकुंभ में पितरों का तर्पण काफी जरूरी है। अगर आप महाकुंभ में स्नान करते हैं तो पितरों का तर्पण भी जरूर करें। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास की मानें तो  अगर मृत्यु के बाद पितरों का तर्पण नहीं किया जाए तो उन्हें मोक्ष नहीं मिलता है या फिर कहें कि उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। पितरों के आशीर्वाद पाने से लेकर पितरों के दोष मुक्ति तक के लिए तर्पण करना जरूरी है।
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महाकुंभ नगर संगम तट पर स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु की भारी भीड़. - फोटो : संवाद
महाकुंभ में तर्पण का महत्व
कहते हैं कि हर व्यक्ति को महाकुंभ में आकर अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए। इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है और तर्पण करने वाले व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।


 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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