क्या है अखाड़ा, कैसे हुई इसकी शुरुआत?
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महाकुंभ 2025 के दौरान कई शुभ तिथियां आएंगी, जिन्हें पवित्र स्नान के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। इन तिथियों पर लाखों श्रद्धालु और साधु-संत गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे। इस प्रकार, महाकुंभ न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।