द्वादशी तिथि पर करें पारण
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द्वादशी तिथि पर करें पारण और दान-पुण्य
योगिनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण करने से पहले अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना गया है। पद्म पुराण में भी एकादशी व्रत के साथ दान-पुण्य के महत्व का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। योगिनी एकादशी केवल एक उपवास मात्र नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, भगवान विष्णु के प्रति समर्पण और पुण्य कर्मों की सीख देने वाला एक पावन पर्व भी है। मान्यता है कि पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है।
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