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तो इस कारण से सृष्टि में शिवरात्रि बनी सबसे खास रात

Fri, 24 Feb 2017 09:55 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल
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shivling
पुराणों में बताया गया है क‌ि फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी साल की सभी रातों में खास है। इस रात को कालरात्र‌ि और स‌िद्ध‌ि की रात भी कहते हैं क्योंक‌ि सृष्ट‌ि में इस द‌िन एक बड़ी घटना हुई थी ज‌िसका इंतजार सभी देवी-देवता और ऋष‌ि मुन‌ि कर रहे थे।
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तो इस कारण से सृष्ट‌ि में श‌िवरात्र‌ि बनी सबसे खास रात

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श‌िव पार्वती
भगवान श‌िव के तपस्या में लीन होने के बाद ताकासुर का प्रकोप बढ़ता जा रहा था। तारकासुर ने इंद्रलोक पर अध‌िकार कर ल‌िया और देवताओं को स्वर्ग से न‌िकाल द‌िया। कोई भी देवी देवता तारकासुर के सामने युद्ध में ठहर नहीं पाते थे क्योंक‌ि तारकासुर को वरदान प्राप्त था क‌ि उसकी मृत्यु केवल भगवान श‌िव के पुत्र के हाथों होगी।
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श‌िव पार्वती व‌िवाह
सती के आत्मदाह के बाद इस बात की संभावना करीब-करीब खत्म हो गई थी क्योंक‌ि जब तक भगवान श‌िव दूसरा व‌िवाह नहीं करते तब तक तारकासुर का वध करने वाला पैदा नहीं होता। इस बात से तारकासुर का अत्याचार बढ़ता जा रहा था। ऐसे में देवताओं को देवी पार्वती का ही भरोसा था ज‌िसने सती रूप में देह त्याग करने के बाद दूसरा जन्म ल‌िया था।

तो इस कारण से सृष्ट‌ि में श‌िवरात्र‌ि बनी सबसे खास रात

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श‌िव पार्वती - फोटो : shiv parvati
‌देवताओं ने भगवान श‌िव को तपस्या से व‌िमुख करके देवी पार्वती से व‌िवाह करने के ल‌िए काफी कोश‌िशें की तब जाकर भगवान श‌िव ने महाश‌िवरात्र‌ि की रात देवी पार्वती से व‌िवाह क‌िया। इस तरह महाश‌िवरात्र‌ि की रात प्रकृत‌ि और पुरुष का म‌िलन हुआ और तारकासुर के वध की रणनीत‌ि सफल हुई।
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तो इस कारण से सृष्ट‌ि में श‌िवरात्र‌ि बनी सबसे खास रात

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श‌िव उमा - फोटो : shiv parvati
महाश‌िवरात्र‌ि की रात में भगवान श‌िव और देवी पार्वती का व‌िवाह हुआ था इसल‌िए इस रात का सृष्ट‌ि में बड़ा महत्व है। भगवान श‌िव और देवी पार्वती सृष्ट‌ि में भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले माने गए हैं। इसल‌िए महाश‌िवरात्र‌ि को मोक्ष की रात्र‌ि और मुक्त‌ि की रात्र‌ि भी कहा गया है।
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तो इस कारण से सृष्ट‌ि में श‌िवरात्र‌ि बनी सबसे खास रात

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श‌िवल‌िंग
महाशिवरात्रि की रात में जागरण करते हुए शिव जी की आराधना करने और महामृत्युंजय मंत्र, शिवाष्टक, रुद्राष्टक, रामचरितमानस के बालकांड के अंतर्गत शिव-सती प्रसंग का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। व्रत न भी कर सके, तो उक्त पाठ से भी शिव उपासना का संपूर्ण फल प्राप्‍त कर सकते हैं।
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