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Vrishabha Sankranti 2025: वृषभ संक्रांति कब ? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Sat, 03 May 2025 04:52 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Surya Gochar: वृषभ संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, व्रत, दान और सूर्य उपासना करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा आदि तीर्थों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है।
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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : adobe stock
Vrishabha Sankranti Significance: हिंदू पंचांग के अनुसार वृषभ संक्रांति का पर्व एक अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष को छोड़कर वृष राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस गोचर को धार्मिक ग्रंथों में संक्रांति कहा गया है और जब यह गोचर वैशाख मास में होता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
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वृषभ संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, व्रत, दान और सूर्य उपासना करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा आदि तीर्थों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य को अर्घ्य देने से आयु, आरोग्य और तेज में वृद्धि होती है।
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इस दिन बनने वाले शुभ योग व्रत और पूजा-पाठ को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। यही कारण है कि वृषभ संक्रांति को साल के विशेष पुण्य कालों में एक माना जाता है और इसे धर्म, आस्था और आध्यात्मिक जागरण का पर्व माना जाता है।
 
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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, 15 मई 2025 को सूर्य देव अपनी वर्तमान राशि मेष से निकलकर वृष राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर रात 12 बजकर 11 मिनट पर होगा, जिसके साथ ही वृषभ संक्रांति का शुभ पर्व आरंभ हो जाएगा। सूर्य वृष राशि में 14 जून तक रहेंगे और 15 जून को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति 2025 के शुभ मुहूर्त
पुण्य काल: सुबह 05:57 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
महा पुण्य काल: सुबह 05:30 बजे से 07:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक

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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : adobe
वृषभ संक्रांति के शुभ योग
इस दिन सुबह 07:02 बजे तक शिव योग रहेगा। इसके बाद पूरी रात सिद्ध योग और भद्रावास योग का प्रभाव बना रहेगा, जो दान और पुण्य कर्मों के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : adobe stock
पूजा के विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:07 – 04:49
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 – 03:28
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 – 07:25
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 – 12:38
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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति पर करें सूर्य देव के ये सिद्ध मंत्र
सूर्य देव को ऊर्जा, जीवन और आरोग्यता के प्रतीक माने जाते हैं। व्रत, ध्यान या संक्रांति जैसे पवित्र अवसरों पर इन मंत्रों का जप करने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक बल की प्राप्ति होती है। नीचे दिए गए सूर्य मंत्र विशेष रूप से सिद्ध माने गए हैं-
  • ॐ घृणि सूर्याय नमः
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ
  • ॐ सूर्याय नमः
इन मंत्रों का जाप सूर्योदय के समय या संक्रांति के पुण्य काल में करने से विशेष लाभ मिलता है।
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Vrishabha Sankranti 2025 - फोटो : freepik
सूर्य देव की कृपा से मिलती है आरोग्यता
शास्त्रों में माना गया है कि सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को निरोगी और दीर्घायु जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। खासतौर पर व्रत, संक्रांति और रविवार के दिन सूर्य को अर्घ्य देने, मंत्र जाप और उपासना करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है। इसलिए, सूर्य देव की आराधना को आयु, स्वास्थ्य और आत्मबल के लिए अत्यंत फलदायी बताया गया है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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