Vat Savitri Vrat 2026
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वट सावित्री व्रत पूजा विधि
- वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष के पास माता सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा रखें।
- इसके बाद एक साफ लोटे में जल लेकर वृक्ष की जड़ों में अर्पित करें।
- इस दौरान कुछ फूल भी वट वृक्ष के पास रखें और अक्षत, रोली और भीगे हुए चने भी अर्पित करें।
- अब कुछ मौसमी फल लेकर वट वृक्ष के पास रखें और धूपबत्ती जला लें।
- इसके बाद चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें।
- वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करें और सभी बड़ों का आशीर्वाद लें।
- अंत में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा करें और व्रत से जुड़े नियमों का पालन करें।
वट सावित्री व्रत की आरती
अश्वपती पुसता झाला।। नारद सागंताती तयाला।।
अल्पायुषी स त्यवंत।। सावित्री ने कां प्रणीला।।
आणखी वर वरी बाळे।।मनी निश्चय जो केला।।
आरती वडराजा।।
दयावंत यमदूजा। सत्यवंत ही सावित्री।
भावे करीन मी पूजा। आरती वडराजा ।।
ज्येष्ठमास त्रयोदशी। करिती पूजन वडाशी ।।
त्रिरात व्रत करूनीया। जिंकी तू सत्यवंताशी।
आरती वडराजा ।।
स्वर्गावारी जाऊनिया। अग्निखांब कचळीला।।
धर्मराजा उचकला। हत्या घालिल जीवाला।
येश्र गे पतिव्रते। पती नेई गे आपुला।।
आरती वडराजा ।।
जाऊनिया यमापाशी। मागतसे आपुला पती।
चारी वर देऊनिया। दयावंता द्यावा पती।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी कीर्ती। ऐकुनि ज्या नारी।।
तुझे व्रत आचरती। तुझी भुवने पावती।।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी स्तुती। त्रिभुवनी ज्या करिती।।
स्वर्गी पुष्पवृष्टी करूनिया। आणिलासी आपुला पती।।
अभय देऊनिया। पतिव्रते तारी त्यासी।।
आरती वडराजा ।।
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