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Vat Savitri Vrat 2021: वट सावित्री अमावस्या पर क्यों होती है बरगद की पूजा,जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व ?

Thu, 10 Jun 2021 03:50 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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Happy Vat Savitri Vrat 2021 - फोटो : अमर उजाला
इस साल वट सावित्री व्रत 10 जून गुरुवार को रखा जाएगा। वट सावित्री व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए एक बड़ा व्रत माना गया है। हिंदू पंचाग के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागन स्त्रियां बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने जीवन साथी की लंबी उम्र की कामना करती हैं। मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संतापों का नाश करने वाली होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पांच वटवृक्षों में अक्षयवट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट का महत्व अधिक है। प्रयाग में अक्षयवट, नासिक में पंचवट, वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है।

।।तहं पुनि संभु समुझिपन आसन। बैठे वटतर, करि कमलासन।। भावार्थ यह है कि कई सगुण साधकों, ऋषियों, यहां तक कि देवताओं ने भी वट वृक्ष में भगवान विष्णु की उपस्थिति के दर्शन किए हैं।
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Happy Vat Savitri Vrat 2021 - फोटो : अमर उजाला
बरगद के वृक्ष का धार्मिक महत्व
अक्सर आपने देखा होगा की पीपल और वट वृक्ष की परिक्रमा का विधान है। इसकी पूजा के भी कई कारण है,आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्व के बोध के नाते भी स्वीकार किया जाता है।ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा,तने में भगवान विष्णु एवं डालियों में त्रिनेत्रधारी शंकर का निवास होता है एवं इस पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है अतः संतान प्राप्ति के लिए इच्छुक महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं।अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्वर माना गया है।वट वृक्ष की छाँव में ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुनः जीवित किया था।
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Happy Vat Savitri Vrat 2021 - फोटो : अमर उजाला
इसी मान्यता के आधार पर स्त्रियां अचल सुहाग की प्राप्ति के लिए इस दिन वरगद के वृक्षों की पूजा करती हैं।शास्त्रों के अनुसार जिस समय भगवान विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न हुआ था उसी वक्त यक्षों के राजा मणिभद्र से वट वृक्ष उत्पन्न हुआ।यक्ष के नाम से बरगद के पेड़ को यक्षवास,यक्षतरु और यक्ष वारुक आदि नामों से जाना जाता है।मान्यता है कि प्रलय के अंत में भगवान श्री कृष्ण ने इसी वृक्ष के पत्ते पर मार्कण्डेय ऋषि को दर्शन दिए थे।बरगद को साक्षात शिव भी कहा गया है, बरगद को देखना शिव के दर्शन करना है। 

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Happy Vat Savitri Vrat 2021 - फोटो : अमर उजाला
वैज्ञानिक महत्व
धार्मिक आस्थाओं के साथ-साथ यह वृक्ष पर्यावरण के संरक्षण और उसको साफ सुथरा बनाए रखने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बरगद के पेड़ और इसकी पत्तियों में कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने  की सबसे ज्यादा क्षमता होती है। पीपल के सामान ही यह वृक्ष भी बहुत अधिक मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं।पर्यावरणविदों की मानें तो यह पेड़ एक नैचुरल एयर प्यूरीफायर है जो प्रदूषित गैसों जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन को हवा से सोख कर पर्यावरण में ऑक्सीजन को छोड़ता है।माना गया है कि एक हरा-भरा बरगद का पेड़ 20 घंटे से भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देता है।इसलिए बरगद का वृक्ष भी पर्यावरण के लिए किसी वरदान से कम नहीं।
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इस वृक्ष की छाया सीधे मन पर सकारात्मक असर डालती है और मन को शांत बनाये रखती है। अकाल में भी यह वृक्ष हरा भरा रहता है। आयुर्वेद के अनुसार बरगद का पेड़ अनेक बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है।इसके फल,जड़, छाल,पत्ती से कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधियां बनाई जाती हैं। देखा जाए तो इस पर्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिलता है।वृक्ष होंगे तो पर्यावरण बचा रहेगा और तभी जीवन संभव है।
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