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Vat Amavasya Vrat: कब रखा जाएगा वट अमावस्या व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sun, 26 Apr 2026 07:33 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Vat Savitri Vrat: ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं के लिए खास होता है जिसमें वे पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं, जानें इस वर्ष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

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vat savitri amavasya - फोटो : amar ujala
Vat Savitri Amavasya Vrat 2026: सनातन परंपरा में ज्येष्ठ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और इसी माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए बेहद अहम होता है, जो अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ इसे श्रद्धा भाव से करती हैं। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा का खास विधान है, जिसे अमरत्व और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस वर्ष वट सावित्री व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि।
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वट सावित्री व्रत तिथि - फोटो : अमर उजाला
वट सावित्री व्रत तिथि 
ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि आरम्भ: 16 मई , प्रातः 05:11 मिनट पर
ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि  समाप्त: 17 मई, रात्रि  01:30 मिनट पर 
 उदया तिथि के अनुसार, 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। 
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वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त 
  • वट सावित्री व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त:  प्रातः 04:07 मिनट से 04:48 मिनट तक 
  • विजय मुहूर्त:  दोपहर 02:04 मिनट से 03:28 मिनट तक 
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:04 मिनट से लेकर 07:25 मिनट तक 
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि  11:57 मिनट से  रात्रि 12:38 मिनट तक 
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वट सावित्री व्रत पूजा विधि - फोटो : adobe
वट सावित्री व्रत पूजा विधि 
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर मन ही मन व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा के लिए बांस की दो टोकरी तैयार करें और उनमें सप्तधान्य भरें।
  • एक टोकरी में ब्रह्मा जी और सावित्री माता की प्रतिमा स्थापित करें।
  • दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की प्रतिमा रखें।
  • माता सावित्री को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें और विधि-विधान से पूजन करें।
  • सावित्री माता के मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।
  • इसके बाद वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करें और जड़ों में जल चढ़ाएं।
  • पेड़ की परिक्रमा करें और साथ ही तने पर कच्चा सूत लपेटते जाएं।
  • 7, 28 या 108 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
  • वट वृक्ष के नीचे बैठकर व्रत कथा सुनें या सुनाएं।
  • अंत में पति की लंबी आयु, सुख-शांति और समृद्धि के लिए माता सावित्री से प्रार्थना करें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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