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Shani Jayanti 2026: शनि जयंती कब है? जानें तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Sat, 25 Apr 2026 12:52 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शनि जयंती का पर्व शनिदेव की कृपा पाने और शनि दोषों को शांत करने के लिए खास माना जाता है, जानें इस वर्ष इसकी तिथि, महत्व और पूजा करने की सही विधि।
 
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शनि जयंती 2026 - फोटो : amar ujala
Shani Jayanti 2026: ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय के देवता माना गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। उनकी कृपा से जीवन में सफलता, धन और स्थिरता आती है, वहीं उनकी नाराजगी से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि लोग शनि से जुड़े दोषों को लेकर काफी सजग रहते हैं। इन प्रभावों को शांत करने और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनि जयंती का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस वर्ष शनि जयंती की तिथि और इसे मनाने की सही पूजा विधि।
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शनि जयंती तिथि - फोटो : अमर उजाला AI
शनि जयंती तिथि 
ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि आरंभ: 16 मई ,  शनिवार,  प्रात:काल 05:11 बजे 
ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई , रविवार, दोपहर 01:30 बजे तक 
इस प्रकार उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती का महापर्व 16 मई 2026 को मनाया जाएगा। 
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नजदीकी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें। - फोटो : adobe stock
शनि जयंती पूजा विधि
  • सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें, स्नान के पानी में काला तिल मिलाना शुभ माना जाता है।\
  • स्नान के बाद स्वच्छ और सादे वस्त्र पहनकर मन को शांत रखें और पूजा का संकल्प लें।
  • नजदीकी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें।
  • पूजा में नीले या गहरे रंग के फूल चढ़ाएं और काला तिल अर्पित करें।
  • काली उड़द की दाल, लोहे की वस्तु और काले वस्त्र भी अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • शनिदेव की कृपा के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • शनि चालीसा और शनि मंत्रों का श्रद्धा के साथ पाठ करें।
  • अंत में शनिदेव से अपने कष्टों को दूर करने और जीवन में स्थिरता व सुख की कामना करें।

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सरसों का तेल और चाय पत्ती जैसी आवश्यक वस्तुओं का भी दान करना शुभ माना जाता है। - फोटो : अमर उजाला
शनि जयंती के उपाय 
  • शनि जयंती के दिन शनि मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे आटे का चौमुखा दीपक बनाकर सरसों के तेल से जलाएं।
  • इस दिन जरूरतमंद या दिव्यांग व्यक्ति को काले जूते, काला छाता और काले रंग के वस्त्र दान करें।
  • सरसों का तेल और चाय पत्ती जैसी आवश्यक वस्तुओं का भी दान करना शुभ माना जाता है।
  • शनि जयंती पर शनि देव के मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का अधिक से अधिक जाप करें।
  • श्रद्धा और नियम से किए गए ये उपाय शनिदेव की कृपा दिलाने वाले माने जाते हैं।
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मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। - फोटो : अमर उजाला
शनि जयंती का धार्मिक महत्व 
शनि जयंती को शनिदेव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर आता है। इस दिन को विशेष रूप से शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और शनि से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और व्यक्ति को अपने कर्मों का शुभ फल प्राप्त होता है। साथ ही यह दिन आत्मशुद्धि और पाप कर्मों से मुक्ति का अवसर भी माना जाता है। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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