देवी सरस्वती का दिन
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, वसंत पंचमी के रूप में सर्वज्ञात है। इस दिन ज्ञान, वाणी एवं ललित कलाओं की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा-आराधना की जाती है। प्रातःकाल नित्य क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद पूरे शरीर में तेल का उबटन लगाकर स्नान के बाद बसंती रंग के वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु, शिव, गणेश और सरस्वती की पूजा करते हैं। इसके साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण, कामदेव और रति की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में पारिवारिक प्रेम, स्नेह, प्रसन्नता आदि में वृद्धि होती है। सरस्वती पूजन में पीला चंदन, पीले वस्त्र, पीले पुष्प, बेसन से बने मिष्ठान, केसर एवं हल्दी मिले हुए मीठे चावल का भोग लगाया जाता है।