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Utpanna Ekadashi 2025: आखिर क्यों खास है उत्पन्ना एकादशी ? जानें नवंबर में कब रखा जाएगा यह व्रत

Fri, 07 Nov 2025 11:44 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Utpanna Ekadashi 2025: मार्गशीर्ष माह का प्रारंभ हो चुका है और इसके कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह दिन माता एकादशी के जन्म से जुड़ा है।
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उत्पन्ना एकादशी 2025 - फोटो : Amar Ujala
Utpanna Ekadashi 2025: मार्गशीर्ष माह का प्रारंभ हो चुका है और इसके कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह दिन माता एकादशी के जन्म से जुड़ा है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु के शरीर से देवी एकादशी की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए पूजा-पाठ व दान-दक्षिणा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। शास्त्रों के मुताबिक,  उत्पन्ना एकादशी पर भगवान विष्णु को पीली चीजें अर्पित करने पर भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में शुभता आती है। इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी 15 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में आइए इसके महत्व और पूजन विधि को जानते हैं।

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उत्पन्ना एकादशी 2025 - फोटो : Adobe Stock
उत्पन्ना एकादशी 2025
  • पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि का प्रारंभ 15 नवंबर 2025 को देर रात 12 बजकर 49 मिनट पर होगा।
  • तिथि का समापन 16 नवंबर को देर रात 02 बजकर 37 मिनट पर होगा।
  • उदया तिथि के मुताबिक, उत्पन्ना एकादशी का व्रत 15 नवंबर 2025 को रखा जाएगा।
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उत्पन्ना एकादशी 2025 - फोटो : Adobe Stock
शुभ योग
उत्पन्ना एकादशी पर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का योग बन रहा है। इसके अलावा विष्कुम्भ योग का संयोग होने से व्रत की महत्ता अधिक बढ़ गई है। इस दिन सुबह 11:44-12:27 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।

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उत्पन्ना एकादशी 2025 - फोटो : Adobe Stock
उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि
  • उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • पूजा के लिए एक साफ चौकी पर पीले रंग का वस्त्र स्थापित करें।
  • फिर आप भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को उसपर स्थापित करें।
  • अब प्रभु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। फूल माला पहनाएं।
  • इसके बाद शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं।
  • विष्णु जी को केसर खीर और केले का भोग लगाएं।
  • अब आप गुड़ और चने को भी भोग के रूप में चढ़ाएं।
  • इस दौरान प्रभु को पीले वस्त्र, चंदन, तुलसी दल, अक्षत और पीले फूल भी चढ़ाएं।
  • अब “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • अंत में विष्णु जी की आरती करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। साथ ही पूजा में हुई भूल करी क्षमा मांगे।
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उत्पन्ना एकादशी 2025 - फोटो : Adobe Stock
पूजा मंत्र
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:।।
  • शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
  • लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुम् भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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