फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

South Indian Festivals: दक्षिण भारत के 16 अनोखे व्रत-त्योहार, उत्तर भारत में नहीं हैं इतने प्रचलित

Wed, 19 Aug 2026 02:16 PM IST
शैली प्रकाश शैली प्रकाश

सार

16 Famous Festivals of South India: आइए जानते हैं दक्षिण भारत के 16 प्रमुख व्रत एवं त्योहारों को जिनके बारे में उत्तर भारत में कम लोग ही जानते हैं।  
विज्ञापन
1 of 16
दक्षिण भारत के 16 अनोखे व्रत-त्योहार - फोटो : AI
Traditional Festivals of South India: दक्षिण भारत में कई ऐसे पारंपरिक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विशिष्टता के कारण उत्तर भारत में प्रचलित नहीं हैं। यह त्योहार दक्षिण भारतीय राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश में प्रचलित हैं जो मुख्य रूप से इन्हीं राज्यों में मनाए जाते हैं। ऐसे ही 16 प्रमुख व्रत एवं त्योहारों को जानिए विस्तार से।

1. कार्तिकेय/ मुरुगन स्वामी से जुड़े व्रत एवं त्योहार (तमिलनाडु)
महत्व: उत्तर भारत में भगवान कार्तिकेय की पूजा का प्रचलन सीमित है, लेकिन तमिलनाडु में वे 'भगवान मुरुगन' के रूप में मुख्य आराध्य हैं। इनकी पूजा का खास महत्व माना गया है।

थाईपुसम: इस दिन भक्त भगवान मुरुगन को प्रसन्न करने के लिए 'कावड़ी' उठाते हैं और गहरी आस्था प्रकट करने के लिए कुछ भक्त जीभ या गाल में भाले/सुई चुभोकर (Penance) कठिन मन्नत पूरी करते हैं।

स्कंद षष्ठी: यह 6 दिनों का अत्यंत कठिन व्रत है, जो भगवान मुरुगन द्वारा बुराई (सूरपद्मन) पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
विज्ञापन

2 of 16
ओणम - फोटो : AI
2. ओणम (Onam - केरल)
महत्व: यह केरल का सबसे बड़ा और प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार है, जो राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है।

विशेषता: यह 10 दिनों तक चलने वाला फसल उत्सव है। इस दौरान घरों के बाहर 'पुक्कलम' (फूलों की रंगोली) बनाई जाती है, 'ओणसाद्या' (26 से अधिक व्यंजनों का पारम्परिक भोजन) परोसा जाता है और प्रसिद्ध 'वल्लमकली' (सर्प नौका दौड़ का आयोजन होता है।
विज्ञापन

3 of 16
वरमहालक्ष्मी व्रत - फोटो : AI
3. वरमहालक्ष्मी व्रत (Varamahalakshmi Vratam - कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना)

महत्व: श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पहले आने वाले शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं द्वारा यह व्रत रखा जाता है।

विशेषता: यह उत्तर भारत के 'करवा चौथ' की भांति दक्षिण भारत में अत्यंत लोकप्रिय है। इसमें माता लक्ष्मी के स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाता है और एक कलश (नारियल और वस्त्रों से सज्जित) स्थापित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

4 of 16
थिरुवाथिरा - फोटो : AI
4. थिरुवाथिरा (Thiruvathira - केरल)
महत्व: यह धनु (धनुष) मास में मनाया जाने वाला भगवान शिव का पावन पर्व है।

विशेषता: यह मुख्यतः महिलाओं का त्योहार है। इस दिन महिलाएं रात भर जागकर भगवान शिव की पूजा करती हैं, पारंपरिक 'तिरुवाथिरकली' लोकनृत्य करती हैं और 'कवथु' व 'किज़ंगु' (कंदमूल) से बने विशेष सात्विक व्यंजन ग्रहण करती हैं।
 
विज्ञापन

5 of 16
बोनालू - फोटो : AI
5. बोनालू (Bonalu - तेलंगाना)

महत्व: यह आषाढ़ महीने में मनाया जाने वाला देवी महाकाली का एक प्रमुख लोक-उत्सव है।

विशेषता: महिलाएं मिट्टी के घड़ों (पोत) में चावल, गुड़, दूध और हल्दी से प्रसाद पकाकर, उस घड़े को नीम की पत्तियों और दीये से सजाकर सिर पर रखकर मंदिर तक यात्रा निकालती हैं।
 
विज्ञापन

6 of 16
आडी पेरुक्कु - फोटो : AI
6. आडी पेरुक्कु (Aadi Perukku - तमिलनाडु)

महत्व: यह तमिलनाडु में आडी महीने (जुलाई-अगस्त) के 18वें दिन मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र जल-उत्सव है।

विशेषता: यह पर्व कावेरी जैसी पवित्र नदियों और जल स्रोतों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। प्रकृति में नए जीवन और जल के प्रवाह का जश्न मनाने के लिए महिलाएं नदियों के तट पर एकत्र होकर पूजा करती हैं और विशेष 'चित्रानम' (तरह-तरह के रंगीन चावल जैसे लेमन राइस, इमली चावल, नारियल चावल) बनाकर परिवार के साथ भोजन करती हैं।
 
विज्ञापन

7 of 16
अट्टुकल पोंगल - फोटो : AI
7. अट्टुकल पोंगल (Attukal Pongala - केरल)

महत्व: तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध अट्टुकल भगवती मंदिर में मनाया जाने वाला यह महिलाओं का विशाल धार्मिक उत्सव है।

विशेषता: इस त्योहार का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है क्योंकि यह दुनिया में महिलाओं का सबसे बड़ा एक दिवसीय जमावड़ा होता है। लाखों महिलाएं मंदिर के आसपास कई किलोमीटर के दायरे में सड़कों पर मिट्टी के मटकों में चावल, गुड़ और नारियल से 'पोंगल' (मीठा प्रसाद) पकाकर देवी अट्टुकलाम्मा को अर्पित करती हैं।
 

8 of 16
कार्तिकै दीपम - फोटो : AI
8. कार्तिकै दीपम (Karthigai Deepam - तमिलनाडु और केरल)

महत्व: यह तमिलनाडु का एक प्राचीन दीपोत्सव है, जो कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

विशेषता: उत्तर भारत की दीपावली की तरह ही यह दीपों का पर्व है, लेकिन इसका केंद्र भगवान शिव और मुरुगन स्वामी होते हैं। इस दिन तिरुवन्नमलाई पहाड़ी (अरुणाचलेश्वर मंदिर) के शिखर पर एक विशाल महादीप प्रज्वलित किया जाता है, जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। घर-घर में मिट्टी के 'अगल विलक्कू' (दीपे) सजाए जाते हैं।

9 of 16
बटुकम्मा - फोटो : AI
9. बटुकम्मा (Bathukamma - तेलंगाना)

महत्व: यह तेलंगाना का सबसे बड़ा और विशिष्ट लोक-उत्सव है, जो आश्विन मास (नवरात्रि के दौरान) में 9 दिनों तक मनाया जाता है।

विशेषता: 'बटुकम्मा' का अर्थ है 'जीवित माता देवी'। इसमें महिलाएं मौसमी और प्राकृतिक फूलों को एक शंकु (Cone) के आकार में सुंदर गोपुरम की तरह सजाती हैं। शाम को महिलाएं पारंपरिक साड़ियों में इन फूलों के स्तंभों के चारों ओर घूमकर लोकगीत गाती हैं और अंत में इन्हें जल निकायों में विसर्जित करती हैं।
 

10 of 16
कंबाला - फोटो : AI
10. कंबाला (Kambala - तटीय कर्नाटक)

महत्व: कंबाला मुख्यतः तटीय कर्नाटक का पारंपरिक भैंस-दौड़ खेल/लोक आयोजन है। कर्नाटक पर्यटन इसे Buffalo Race Traditional Folk Sport कहता है। यह कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक कृषि-उत्सव और लोक खेल उत्सव है, लेकिन इसे त्योहार की तरह मनाया जाता है। यह पारंपरिक उत्सव है।

विशेषता: यह मुख्य रूप से कीचड़ भरे खेतों में होने वाली भैंसों की दौड़ (Buffalo Race) है। किसान अच्छी फसल और अपनी पशु संपदा की रक्षा के लिए भगवान मंजुनाथ (शिव) का आशीर्वाद लेने हेतु इसका आयोजन करते हैं।

11 of 16
मासी मगम - फोटो : AI
11. मासी मगम (Masi Magam - तमिलनाडु)

महत्व: यह तमिल महीने 'मासी' (फरवरी-मार्च) में 'मगम' नक्षत्र के दौरान मनाया जाने वाला एक विशाल स्नान उत्सव है।

विशेषता: इस दिन विभिन्न मंदिरों से देवी-देवताओं की उत्सव मूर्तियों को भव्य जुलूस के साथ समुद्र तट, पवित्र नदियों या तालाबों पर लाया जाता है और उन्हें पवित्र स्नान (तीर्थवारी) कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालु भी इस दिन समुद्र या नदी में डुबकी लगाकर पापों से मुक्ति की कामना करते हैं। दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले ये सभी त्योहार अपनी अनूठी परंपराओं और भव्यता के लिए जाने जाते हैं।
 

12 of 16
सूरसम्हारम - फोटो : AI
12. सूरसम्हारम (Soorasamharam - तमिलनाडु)

किससे संबंधित है: भगवान मुरुगन (कार्तिकेय)
कब मनाया जाता है: स्कंद षष्ठी के अंतिम दिन (तमिल महीने ऐप्पसी (Aippasi) में, सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर के दौरान)

महत्व व परंपरा: यह त्योहार भगवान मुरुगन द्वारा असुर 'सूरपद्मन' का वध कर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर में इसका आयोजन बेहद भव्य होता है। इसमें समुद्र तट पर भगवान मुरुगन और राक्षस सूरपद्मन के युद्ध का जीवंत नाटकीय मंचन (Re-enactment) किया जाता है, जिसे देखने लाखों श्रद्धालु आते हैं।
 

13 of 16
पंगुनी उथिरम् - फोटो : AI
13. पंगुनी उथिरम् (Panguni Uthiram - तमिलनाडु)

किससे संबंधित है: शिव-पार्वती, मुरुगन-दैवयानई, और राम-सीता
कब मनाया जाता है: तमिल महीने 'पंगुनी' (मार्च-अप्रैल) में उथिरम (उत्तराफाल्गुनी) नक्षत्र के दौरान।

महत्व व परंपरा: यह दक्षिण भारत का एक अत्यंत पावन 'दिव्य विवाह दिवस' (Celestial Wedding Day) है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कई दिव्य विवाहों का स्मरण किया जाता है। इस दिन दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में देव-विग्रहों का भव्य 'तिरुकल्याणम' (दिव्य विवाह अनुष्ठान) आयोजित किया जाता है।
 

14 of 16
चित्रा पौर्णमि - फोटो : AI
14. चित्रा पौर्णमि (Chitra Pournami - तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश)

किससे संबंधित है: चित्रगुप्त जी (कर्मों का हिसाब रखने वाले देव) और इंद्र देव

कब मनाया जाता है: यह तमिल कैलेंडर के 'चितिराई' (Chithirai) महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अप्रैल-मई के बीच आता है।

महत्व व परंपरा: यह दिन मुख्य रूप से यमराज के सहयोगी 'चित्रगुप्त' को समर्पित है, जो मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इस दिन लोग अपने पापों के प्रायश्चित और सुकर्मों की प्रार्थना के लिए विशेष पूजा करते हैं। इस दिन तिरुवन्नमलाई (अरुणाचलेश्वर) मंदिर की पहाड़ियों की 14 किमी लंबी 'गिरिवलम' (परिक्रमा) करने का विशेष महत्व है।
 

15 of 16
मण्डला पूजा - फोटो : AI
15. मण्डला पूजा (Mandala Pooja - केरल)

किससे संबंधित है: भगवान अयप्पा (सबरीमाला मंदिर)
कब मनाया जाता है: वृश्चिक मास के प्रथम दिन से शुरू होकर 41 दिनों तक (नवंबर मध्य से दिसंबर अंत तक)।

महत्व व परंपरा: यह सबरीमाला अयप्पा मंदिर की प्रसिद्ध तीर्थयात्रा का सबसे मुख्य भाग है। श्रद्धालु 41 दिनों का अत्यंत कठिन व्रत रखते हैं, जिसे 'मण्डल कालम' कहा जाता है। मंडला पूजा 41वें दिन के साथ समाप्त होती है। इस दौरान वे काले या नीले वस्त्र पहनते हैं, सात्विक भोजन करते हैं, नंगे पैर रहते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। 41वें दिन 'मण्डला पूजा' के साथ इस चरण का समापन होता है।
 
विज्ञापन

16 of 16
त्रिशूर पूरम - फोटो : AI
16. त्रिशूर पूरम (Thrissur Pooram - केरल)

किससे संबंधित है: भगवान शिव (वडक्कुन्नाथन मंदिर, त्रिशूर)
कब मनाया जाता है: मेदम (वैशाख) महीने में (अप्रैल-मई)।

महत्व व परंपरा: इसे 'सभी पूरम त्योहारों की मां' कहा जाता है। यह केरल का सबसे भव्य और रंगारंग मंदिर उत्सव है। मुख्य समारोह में लगभग 30 सजे हुए हाथियों का प्रमुख प्रदर्शन होता है जिसकें हाथियों का दो दलों (पारमेक्कावु और थिरुवमबादी) में आमने-सामने जुलूस निकलता है। 'कुडामट्टम' (हाथियों के ऊपर रेशमी छतरियों को तेजी से बदलने की प्रतियोगिता) और 'इलांजिथरा मेलम' (पारंपरिक वाद्य-वृंद) तथा आतिशबाजी इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होते हैं।
 
- शैली प्रकाश
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें