चित्रकूट में तोते के रूप में मिला संकेत
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2. चित्रकूट में तोते के रूप में मिला संकेत
तुलसीदास जी और हनुमानजी से जुड़ी दूसरी लोकप्रिय कथा चित्रकूट की है। मान्यता है कि चित्रकूट में तुलसीदास जी को भगवान श्रीराम के दर्शन हुए, लेकिन वे उन्हें पहचान नहीं पाए। कथा के अनुसार, इसी समय हनुमानजी ने तोते का रूप धारण किया और तुलसीदास जी को संकेत देने के लिए प्रसिद्ध पंक्तियां सुनाईं-
“चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर।
तुलसीदास चंदन घिसें, तिलक देत रघुबीर॥”
इन पंक्तियों को सुनकर तुलसीदास जी को एहसास हुआ कि उनके सामने स्वयं भगवान श्रीराम उपस्थित हैं। इसके बाद उन्होंने प्रभु को पहचान लिया और उनके चरणों में नतमस्तक हो गए। चित्रकूट में इस प्रसंग की स्थानीय धार्मिक परंपरा आज भी प्रचलित है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले चित्रकूट के वनों में भ्रमण करते समय तुलसीदास जी ने दो सुंदर राजकुमारों को घोड़ों पर सवार होकर धनुष-बाण लिए जाते देखा। वे अत्यंत तेजस्वी थे, लेकिन तुलसीदास जी उन्हें पहचान नहीं पाए। बाद में हनुमान जी ने उन्हें बताया कि वे स्वयं भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी थे। तुलसीदास जी को अपने न पहचान पाने पर बड़ा पश्चाताप हुआ।