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Solah Somvar Vrat 2025: कब से करें सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत? जानिए शुभ तिथि और पूजा विधि

Wed, 09 Jul 2025 10:43 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Solah Somwar importance: सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने का विशेष उपाय है, जो वैवाहिक सुख, मनचाहा जीवनसाथी और पारिवारिक शांति प्रदान करता है। सावन माह में आरंभ किया गया यह व्रत विशेष रूप से फलदायक माना जाता है।
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सोलह सोमवार व्रत सावन जैसे पवित्र महीनों में शुरू करना सबसे उत्तम माना जाता है, - फोटो : adobe
Solah Somvar Vrat Start Date: अगर आप अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की कामना करती हैं, या फिर मनचाहा जीवनसाथी पाना चाहती हैं, तो सोलह सोमवार का व्रत आपके लिए बहुत ही शुभ और फलदायक हो सकता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। जहां कुंआरी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं, वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखद दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए इसे करती हैं।
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सोलह सोमवार व्रत की खास बात यह है कि इसे सावन जैसे पवित्र महीनों में शुरू करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह महीना भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष होता है। इस व्रत में भक्त लगातार 16 सोमवार तक व्रत रखते हैं, भगवान शिव की पूजा करते हैं और व्रत कथा सुनते हैं। इस संकल्प से व्यक्ति को न सिर्फ पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं।
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हला श्रावण सोमवार 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है, जो सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। - फोटो : adobe
सोलह सोमवार व्रत का संकल्प कब करें?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत के लिए सबसे शुभ समय श्रावण मास को माना गया है। यह महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष फलदायी होता है। साल 2025 में श्रावण मास की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है और यह 9 अगस्त तक रहेगा।

इस दौरान पहला श्रावण सोमवार 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है, जो सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन से आप व्रत का संकल्प लेकर लगातार 16 सोमवार तक शिवजी का व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और व्रती की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
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घर के पूजा स्थान या जहां शिवलिंग स्थापित है, वहां सफाई करें। फिर गंगाजल का छिड़काव करके पूरे स्थान को पवित्र करें। - फोटो : Adobe stock
सोलह सोमवार व्रत विधि
  • सोलह सोमवार व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त  में उठें। स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें। स्त्रियां साफ़ सफ़ेद या हल्के रंग के वस्त्र पहन सकती हैं, जबकि पुरुष पारंपरिक धोती आदि धारण कर सकते हैं।
  • घर के पूजा स्थान या जहां शिवलिंग स्थापित है, वहां सफाई करें। फिर गंगाजल का छिड़काव करके पूरे स्थान को पवित्र करें।
  • शिवलिंग को पहले गंगाजल से स्नान कराएं, फिर गाय के दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से धोकर साफ करें। अभिषेक के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करते रहें।
  • अब भगवान शिव को  बेलपत्र (त्रिपत्र सहित), धतूरा, भांग,सफेद पुष्प (जैसे कनेर, चमेली आदि),भस्म (विभूति),गाय का दूध, मिठाई, फल और शहद आदि सामग्रियां  अर्पित करें। 
  • अब बैठकर शांति से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। चाहें तो रुद्राक्ष की माला का प्रयोग भी कर सकते हैं। साथ ही भगवान शिव के 108 नामों का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
  • अब शिव चालीसा का पाठ करें। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें।
  • पूजा के अंत में भगवान शिव से मनोकामना पूर्ण होने, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। व्रत पूर्ण श्रद्धा से रखें और संकल्प लें कि आप अगले 16 सोमवार तक इसी तरह नियमपूर्वक पूजा करेंगे।
  • पूरे दिन सात्विक आहार लें, अगर संभव हो तो फलाहार करें। शाम को भी भगवान शिव का स्मरण करें और अगले सोमवार को भी इसी तरह व्रत जारी रखें।
 
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मान्यता है कि इस महीने में जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा, व्रत, दान या ध्यान करता है, उसे उसका कई गुना फल मिलता है। - फोटो : Instagram
श्रावण मास से ही क्यों करें इसकी शुरुआत 
श्रावण मास भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा, व्रत, दान या ध्यान करता है, उसे उसका कई गुना फल मिलता है। इसी श्रावण माह में यदि कोई व्यक्ति सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत करता है, तो उसे न केवल सांसारिक सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मन की शांति भी मिलती है। यह व्रत पुराने कर्मों के दोषों को भी शांत करता है। कहा जाता है कि जब यह उपवास पूरी श्रद्धा और सही विधि से किया जाता है, तो भगवान शिव भक्त की हर सच्ची इच्छा जरूर पूरी करते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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