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Shravan Vishesh: शिवलिंग पर इन जगहों पर लगाएं चंदन, मिलेगा आशीर्वाद और सुख-समृद्धि

Sun, 20 Jul 2025 06:46 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Importance of Chandan in Shiv puja: सावन के सोमवार को शिव जी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने की कोशिश करते हैं।
 
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shivling par kaise lagaein chandan - फोटो : adobe stock
Shivling Puja Rules: सावन का पावन महीना शुरू होते ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। हर कोई भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखता है, जल चढ़ाता है और विविध पूजा विधियों से उनकी आराधना करता है। खासतौर पर सावन के सोमवार को शिव जी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने की कोशिश करते हैं।
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हालांकि बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि शिवलिंग पर चंदन लगाने की एक बेहद खास परंपरा भी होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगर शिवलिंग के सात विशिष्ट स्थानों पर चंदन लगाया जाए, तो भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। माना जाता है कि ये सात स्थान न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनसे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अगर आप सावन में शिवजी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इस विशेष चंदन विधि को अपनाकर उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
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Shivling Puja Vidhi - फोटो : freepik
शिवलिंग का ऊपरी भाग
शिवलिंग का गोलाकार शीर्ष भाग भगवान शिव का प्रमुख स्वरूप माना जाता है। यहां चंदन लगाने से मन शांत होता है और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
 
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बाबा महाकाल को 11 मटकियों से चढ़ाया जा रहा जल। - फोटो : अमर उजाला
जल बहने का स्थान (जलाधारी)
यह वह स्थान है जहां से जल शिवलिंग से होकर बाहर निकलता है। इसे देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है। इस पर चंदन लगाने से वैवाहिक जीवन में मधुरता और घर में सुख-शांति आती है।

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Shivling Jalabhishek - फोटो : adobe
दाहिनी ओर – गणेश जी का स्थान
जलाधारी के दाहिने ऊपरी हिस्से को गणेश जी का स्थान माना गया है। यहां चंदन लगाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
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Shivling At Home - फोटो : iStock
बाईं ओर – कार्तिकेय जी का स्थान
बाईं ओर का हिस्सा कार्तिकेय जी का माना जाता है, जो वीरता और आत्मबल के देवता हैं। इस स्थान पर चंदन लगाने से आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।
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Sawan 2025 - फोटो : adobe
जल की धार का मार्ग – अशोक सुंदरी का स्थान
शिव-पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी के लिए यह भाग समर्पित है। इस स्थान पर चंदन लगाने से परिवार में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है।
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अमरनाथ धाम के लिए नंदी मूर्ति का निर्माण करते हुए मूर्तिकार अरुण योगीराज - फोटो : एक्स/@yogiraj_arun
नंदी के दोनों सींग
नंदी भगवान शिव के वाहन हैं और शिवलिंग के सामने विराजमान रहते हैं। उनके सींगों पर चंदन लगाने से प्रार्थनाएं शीघ्र भगवान तक पहुंचती हैं और भक्ति का भाव प्रबल होता है।

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सावन माह में शिव आराधना का महत्व - फोटो : adobe
शिवलिंग का पिछला भाग
यह स्थान समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। यहां चंदन अर्पण करने से शिव जी के साथ-साथ उनका पूरा परिवार प्रसन्न होता है और भक्त को सम्पूर्ण रूप से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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Sawan - फोटो : Adobe stock
क्यों होती है यह पूजा इतनी विशेष?
श्रावण मास में शिवलिंग पर चंदन अर्पण करना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक भावपूर्ण साधना है। जब भक्त पूरे मन और श्रद्धा से शिवलिंग के सात विशिष्ट स्थानों पर चंदन लगाता है, तो वह केवल भगवान शिव को ही नहीं, बल्कि उनके सम्पूर्ण परिवार को भी आदरपूर्वक नमन करता है। यह पूजा शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, अशोक सुंदरी और नंदी सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न करने का माध्यम बन जाती है। इसका प्रभाव केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी दिखाई देता है – जैसे मन को शांति मिलना, घर में सुख-शांति का वास, आर्थिक स्थिति में सुधार और शारीरिक सेहत में लाभ।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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