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Sawan 2025: सावन में शिव चालीसा का पाठ करने से मिलते हैं ये चार बड़े लाभ, जानें इनके बारे में

Wed, 09 Jul 2025 11:36 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sawan 2025: प्रेम-भक्ति का महीना सावन इस वर्ष 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। यह भगवान शिव का प्रिय माह है, जिसमें प्रभु की पूजा-अर्चना करने से वह बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। 
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Sawan 2025 - फोटो : adobe stock
Sawan 2025: प्रेम-भक्ति का महीना सावन इस वर्ष 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। यह भगवान शिव का प्रिय माह है, जिसमें प्रभु की पूजा-अर्चना करने से वह बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि सावन को न केवल माह बल्कि महादेव की विशेष कृपा पाने का अवसर कहा जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक सावन में ही महादेव ने पार्वती जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। शास्त्रों में भी इस माह की महिमा का उल्लेख है। कहा जाता है कि सावन में भोलेनाथ धरती पर वास करते हैं। ऐसे में तप-तपस्या, प्रार्थना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने पर पूजा का संपूर्ण फल मिलता है।

इस दौरान शिव चालीसा का पाठ करना और भी कल्याणकारी होता है। बता दें, शिव चालीसा महाकाल को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है। इससे कष्टों का निवारण और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना पूरी होती हैं। आइए इस शक्तिशाली चालीसा को जानते हैं।

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Sawan 2025 - फोटो : adobe
सावन के सोमवार व्रत की तिथियां 
14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार
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Sawan 2025 - फोटो : adobe
शिव चालीसा पाठ के लाभ
सावन में नियमित शिव चालीसा का पाठ करने से साधक की समस्त समस्याएं समाप्त होने लगती हैं। इसके अलावा भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, मन की शांति और रोगों से छुटकारा भी प्राप्त होता है।

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Sawan 2025 - फोटो : adobe
शास्त्रों में सावन की महिमा का उल्लेख है। यह महादेव के प्रिय माह के रूप में जाना जाता है। यदि सावन में केवल सच्चे भाव से शिव पूजन और शिव चालीसा का पाठ किया जाए, तो महाकाल सभी कष्टों को हर लेते हैं। 
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Sawan 2025 - फोटो : freepik
शिव चालीसा
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥


जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन छार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥

कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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