शीतला अष्टमी पूजा विधि: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी(बासोड़ा) का त्योहार हमें स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है।
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Sheetala Ashtami 2022 Today Puja Muhurat And Puja Vidhi : चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी(बासोड़ा) का त्योहार हमें स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है। स्कंद पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि को रोगमुक्त रखने का कार्यभार देवी शीतला को सौंपा था इसलिए प्राचीन काल से ही चैत्र कृष्ण अष्टमी को महाशक्ति के अनंतरूपों में से प्रमुख शीतला माता की पूजा-अर्चना की जाती रही है,जो स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी भी हैं। इनकी पूजा से दैहिक तापों ज्वर,चेचक,कुष्ठरोग ,फोडे-फुंसियां,चर्म रोग,संक्रमण तथा अन्य विषाणुओं के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है। इस दिन आप कुछ सरल उपाय करके पूजा का फल पूर्णरूप से प्राप्त कर सकते हैं।
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Sheetala Ashtami
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माता के भोग के लिए बासोड़ा से एक दिन पहले ही मीठे चावल,राबड़ी,पुए,हलवा,रोटी आदि पकवान तैयार कर लिए जाते हैं और अगले दिन सुबह बासी भोजन ही देवी को चढ़ाया जाता है।
इस दिन शीतल जल से ही स्नान करने का विधान है,ये इस बात का भी संकेत है कि यहां से ग्रीष्म ऋतु का आरंभ होता है और शीतल जल शरीर को निरोगी बनाने में मदद करता है।
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माता शीतला देवी मंदिर
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शीतला अष्टमी के दिन अपने घर में झाडू और सूप जरूर लेकर आएं,ऐसा करना शुभ माना गया है। वहीं इस बात का दूसरा पहलू यह है कि हमें अपने आस-पास सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए।
घर की सुख-शांति के लिए मां शीतला की पूजा करने के बाद होलिका दहन वाले स्थान पर भी जल और पूजन सामग्री अर्पित करनी चाहिए।
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शीतलाष्टमी 2022 पूजा विधि
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शीतला माता पर चढ़ाए हुए जल से आंखें धोने का विधान है।यह बात इस बात की ओर इशारा करती है कि गर्मी के मौसम में हमें अपनी आखों का ध्यान रखना चाहिए।
पूजन करने के बाद माथे पर हल्दी का तिलक व घर के मुख्यद्वार पर परिवार की मंगल कामना हेतु हल्दी के दो स्वास्तिक बनाए जाते हैं। माना जाता है कि हल्दी का प्रयोग हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है,घर का वास्तुदोष दूर होता है।
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शीतला अष्टमी के दिन कुम्हारन को प्रसाद के रूप में कुछ न कुछ जैसे रोटी,चावल,पुए,पकोड़ी अवश्य देना चाहिए और साथ ही दक्षिणा भी देनी चाहिए। मान्यता है कि जब तक कुम्हारन कुछ नहीं खाती है तब तक शीतला माता की पूजा का फल नहीं मिलता।
शीातला माता की आरती करने के लिए अग्नि प्रज्वल्लित नहीं की जाती। इसलिए इस दिन देवी आरती ताजे पुष्प और जल से करें।