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Shattila Ekadashi 2026: जनवरी में कब है षटतिला एकादशी व्रत ? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

Fri, 02 Jan 2026 03:47 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर तिल का दान और उसका सेवन करना अत्यंत शुभ होता है। कहते हैं कि, षटतिला पर तिल का दान, स्नान, भोजन, उबटन, हवन और जल में तिल का उपयोग करने पर साधक के पापों का नाश होता है। 
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Shattila Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला
Shattila Ekadashi 2026: पंचांग मुताबिक, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर षटतिला एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा का विशेष विधान है। मान्यताओं के मुताबिक, षटतिला एकादशी पर तिल का दान और उसका सेवन करना अत्यंत शुभ होता है। कहते हैं कि, षटतिला पर तिल का दान, स्नान, भोजन, उबटन, हवन और जल में तिल का उपयोग करने पर साधक के पापों का नाश होता है। यही नहीं पूर्व जन्मों के दोष भी समाप्त होते हैं। इसके अलावा लक्ष्मी माता भी प्रसन्न होकर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं और साधक की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि, साल 2026 में यह व्रत कब रखा जाएगा।
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Shattila Ekadashi 2026 - फोटो : Adobe Stock
षटतिला एकादशी 2026
पंचांग के मुताबिक, माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 14 जनवरी को शाम 5 बजकर 52 मिनट पर है। ऐसे में 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी व्रत किया जाएगा। इस दिन मकर संक्रांति का पर्व भी देशभर में मनाया जाएगा। वहीं व्रत का पारण 15 जनवरी को कर सकते हैं। इस दिन आप सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 21 मिनट तक व्रत खोल सकते हैं।
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Shattila Ekadashi 2026 - फोटो : Adobe Stock
षटतिला एकादशी पूजा विधि
  • षटतिला एकादशी के दिन सुबह ही स्नान करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। 
  • यह साल की पहली एकादशी है, इसलिए साफ-सफाई और कुछ चीजें दान के लिए अवश्य निकाल लें।
  • अब साफ चौकी पर श्री हरि विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और साथ में देवी लक्ष्मी की मूर्ति भी रखें।
  • फिर प्रभु को वस्त्र अर्पित करें और मूर्ति के पास तिल और गंगाजल छिड़काव कर लें।
  • घी का दीपक जलाएं और पीले फूलों की माला प्रभु को पहनाएं। 
  • अब विष्णु जी को तिल अर्पित करें और केले, गुड़ व चने की दान भोग रूप में उनके समक्ष रख दें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और इसके बाद सृष्टि के पालनहार का स्मरण करते हुए उनकी आरती करें।
  • पूजा के बाद तिल का दान करें। यह बेहद शुभ और महत्वपूर्ण होता है।
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Shattila Ekadashi 2026 - फोटो : Adobe Stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 


 
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