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Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन इस विधि से करें, जानें महत्व, मुहूर्त और मंत्र

Wed, 17 Sep 2025 12:45 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से होता है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा अपने भक्तों के बीच पृथ्वी पर पधारती हैं और उनके कष्टों को हरती है। प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक देवी के नौ स्वरूपों की भव्य आराधना की जाती है।
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से होता है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा अपने भक्तों के बीच पृथ्वी पर पधारती हैं और उनके कष्टों को हरती है। प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक देवी के नौ स्वरूपों की भव्य आराधना की जाती है। इस दौरान घर से लेकर मंदिरों में पूजा-पंडाल लगाकर देवी की मूर्ति को स्थापित किया जाता है और गीत, नृत्य, भजन गाकर भक्तजन पूरे श्रद्धा से अपनी भावनाएं व्यक्त करते है। नवरात्रि केवल देवी की कृपा प्राप्त करने का ही पर्व नहीं है, बल्कि यह मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा के संचार और खुशियों के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025, सोमवार से आरंभ होकर 2 अक्तूबर 2025, गुरुवार को विजयादशमी के दिन समाप्त होगी। ऐसे में शारदीय नवरात्रि की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, आइए जानते हैं।
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : Amar Ujala
शारदीय नवरात्रि  2025 
  • आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 22 सितंबर को रात 01 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी। 
  • इसका समापन 23 सितंबर को रात 02 बजकर 55 मिनट पर होगा। 
  • इसलिए 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : freepik
शारदीय नवरात्रि 2025 कैलेंडर
  • 22 सितंबर 2025 – प्रतिपदा       (शैलपुत्री पूजा)
  • 23 सितंबर 2025 – द्वितीया        (ब्रह्मचारिणी पूजा)
  • 24 सितंबर 2025 – तृतीया         (चन्द्रघण्टा पूजा)
  • 26 सितंबर 2025 – चतुर्थी          (कूष्माण्डा पूजा)
  • 27 सितंबर 2025 – पञ्चमी          (स्कन्दमाता पूजा)
  • 28 सितंबर 2025 – महाषष्ठी       (कात्यायनी पूजा)
  • 29 सितंबर 2025 – महासप्तमी   (कालरात्रि पूजा)
  • 30 सितंबर 2025 – महाअष्टमी    (महागौरी पूजा)
  • 1 अक्टूबर 2025 – महानवमी     (सिद्धिदात्री पूजा)
  • 2 अक्टूबर 2025 – विजयादशमी    

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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : adobe
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषियों के मुताबिक शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।  
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : freepik
पूजा विधि
  • पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।
  • देवी को चुन्नी और वस्त्र सहित अन्य श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
  • इसके बाद रोली और अक्षत से देवी को टीका लगाएं और देवी के समक्ष धूप-दीपक जलाएं।
  • फिर आप फूल की माला देवी को पहनाएं। इसके बाद साफ जल भरकर कलश स्थापित करें और उस पर नारियल रखें।
  • इसके बाद जौ भी बो दें। अब आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।अंत में माता की आरती करते हुए गलतियों की माफी मांगे
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : freepik
पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा को समर्पित      

मां शैलपुत्री बीज मंत्र  

ह्रीं शिवायै नम:

प्रार्थना मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित

मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:

प्रार्थना मंत्र
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित

मां चंद्रघंटा बीज मंत्र
ऐं श्रीं शक्तयै नम:

प्रार्थना मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

चौथा दिन मां  कूष्मांडा की पूजा को समर्पित

मां कूष्मांडा बीज मंत्र
ऐं ह्री देव्यै नम:

प्रार्थना मंत्र
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : freepik
पांचवा दिन मां स्कंदमाता को समर्पित

मां स्कंदमाता बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:

प्रार्थना मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

छठा माता मां कात्यायनी की पूजा को समर्पित

मां कात्यायनी बीज मंत्र
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:

प्रार्थना मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

सांतवा दिन मां कालरात्रि को समर्पित

मां कालरात्रि बीज मंत्र
क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।

प्रार्थना मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : freepik
आंठवा दिन मां महागौरी की पूजा को समर्पित

मां महागौरी बीज मंत्र
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:

प्रार्थना मंत्र
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री की पूजा को समर्पित

मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

प्रार्थना मंत्र
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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