Shani Jayanti
- फोटो : अमर उजाला
शनि जयंती का धार्मिक महत्व
शनि जयंती वह पावन तिथि है जब न्याय के देवता शनि महाराज का जन्म हुआ था। पुराणों के अनुसार, शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या को हुआ था, और इसलिए इस दिन को शनि अमावस्या भी कहा जाता है। भगवान शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। उन्हें नवग्रहों में एक विशेष स्थान प्राप्त है क्योंकि वे कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता माने जाते हैं। अच्छे कर्म हों या बुरे, शनि देव कभी पक्षपात नहीं करते।
उत्तर भारत में शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाती है, जबकि दक्षिण भारत में इसे वैशाख माह की अमावस्या को मनाया जाता है, क्योंकि वहां का पंचांग अमावस्यांत मास प्रणाली पर आधारित होता है। इस दिन, श्रद्धालु शनि मंदिरों में जाकर तेल चढ़ाते हैं, दीप जलाते हैं और शनि देव का स्मरण कर उनसे दोषों से मुक्ति और कृपा की प्रार्थना करते हैं। यह मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन के कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।