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Shani Jayanti 2025: शनि जयंती पर इस विधि से करें शनि महाराज की पूजा, कर्ज से मिलेगी मुक्ति

Thu, 01 May 2025 06:21 AM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

इस साल 27 मई 2025 को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस तिथि पर कृत्तिका और रोहिणी नक्षत्र के साथ सुकर्मा योग बन रहा है।
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आमतौर पर धार्मिक ग्रंथों में शनि महाराज के प्रभाव और उनकी महिमा का उल्लेख देखने को मिलता है। कहा जात - फोटो : adobe
Shani Jayanti 2025: हिंदू धर्म में शनि देव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है, उनकी आराधना से व्यक्ति को रोग, कर्ज और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त होती हैं। ज्योतिष में उन्हें न्यायाधीश का स्थान प्राप्त है और शनि सभी जातकों को उनके कर्मों के आधार पर फल देते हैं।

आमतौर पर धार्मिक ग्रंथों में शनि महाराज के प्रभाव और उनकी महिमा का उल्लेख देखने को मिलता है। कहा जाता है कि जो लोग लक्ष्य को पूरा करने में कड़ी मेहनत और हमेशा अच्छे कर्म करते हैं, उनपर शनिदेव हमेशा मेहरबान रहते हैं। इस दौरान प्रभु का आशीर्वाद और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए ज्येष्ठ माह को सबसे शुभ माना गया है।

दरअसल, ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस तिथि पर भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था और इस साल 27 मई 2025 को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस तिथि पर कृत्तिका और रोहिणी नक्षत्र के साथ सुकर्मा योग बन रहा है। इस संयोग में पूजा करने पर साढ़ेसाती व ढैय्या का प्रभाव कम हो सकता है। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
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Shani Jayanti 2025 - फोटो : adobe stock
शनि जयंती तिथि
  • ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि प्रारंभ: 26 मई , सोमवार, दोपहर 12:11 मिनट पर
  • ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि समाप्त: 27 मई , मंगलवार, रात्रि 8: 31 मिनट पर
  • शनि जयंती 27 मई 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी।
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Shani Jayanti 2025 - फोटो : freepik
शनि जयंती पूजन विधि
  • शनि जयंती के दिन सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • इसके बाद शनि मंदिर में जाकर सबसे पहले शनिदेव को  सरसों का तेल चढ़ाएं।
  • फिर तिल, उड़द, और लौंग अर्पित करें।
  • अब महाराज के समक्ष दीपक जलाएं।
  • इस बीच 'शनि बीज मंत्र' (ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ) का जप करें।
  • शनि चालीसा और शनि जयंती की कथा का पाठ करें।
  • अब शनि महाराज की आरती करें।
  • अंत में शनि देव का नाम लेते हुए लोहा, जामुन, काला तिल, काले जूते तेल, का दान करें।

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Shani Jayanti 2025 - फोटो : अमर उजाला
शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।

शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
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Shani Jayanti 2025 - फोटो : freepik
शनिदेव को प्रसन्न करने वाले सरल मंत्र
"ॐ शं शनैश्चराय नमः"
"ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
"ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। सय्योंरभीस्रवन्तुनः।।

शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
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Shani Jayanti 2025 - फोटो : अमर उजाला

श्री शनि चालीसा  

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥


जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई।
रामचंद्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पांडव पर भै दशा तुम्हारी।
बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो।
युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।
लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जंबुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लौह चांदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पंडित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥


दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है

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