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Putrada Ekadashi 2024: आज है पुत्रदा एकादशी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Fri, 16 Aug 2024 07:14 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sawan Putrada Ekadashi 2024 - फोटो : अमर उजाला
Sawan Putrada Ekadashi 2024: आज पुत्रदा एकादशी है। वहीं इस माह में आने वाली पुत्रदा एकादशी को सभी व्रतों में विशेष माना गया है। मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का ये व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं। ये व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। माना जाता है कि पुत्रदा एकादशी का उपवास करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु सारे पापों से छुटकारा दिलाते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि इस साल  पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा।

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Sawan Putrada Ekadashi 2024 - फोटो : istock
सावन में कब है पुत्रदा एकादशी ?
पुत्रदा एकादशी तिथि की शुरुआत 15 अगस्त की सुबह 10 बजकर 26 मिनट से होगी। इसका समापन 16 अगस्त सुबह 9 बजकर 39 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 16 अगस्त 2024 को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। 
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Sawan Putrada Ekadashi 2024 - फोटो : freepik
शुभ योग
पंचांग के अनुसार पुत्रदा एकादशी के दिन प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। माना जाता है कि इस योग में लक्ष्मीनारायण की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। इस दिन प्रीति योग दोपहर 1 बजकर 12 मिनट तक रहने वाला है। 

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Sawan Putrada Ekadashi 2024 - फोटो : freepik.com
पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की एक साथ पूजा करें। पूजा के दौरान उन्हें पीले वस्त्र, केला, नारियल, मिठाई आदि अर्पित जरूर करना चाहिए। ऐसा  करने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। फिर पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें। बाद में आरती करें। इसके बाद भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा समाप्त करें। 
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Sawan Putrada Ekadashi 2024 - फोटो : istock
भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

 जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
 
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
 
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
 
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
 
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
 
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
 
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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