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Sawan Pradosh Vrat 2024: कब है सावन का अंतिम प्रदोष व्रत ? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Wed, 07 Aug 2024 01:21 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : अमर उजाला
Sawan Pradosh Vrat 2024 Date: हिंदू धर्म में सावन माह को महादेव की पूजा के लिए अति शुभ माना जाता है। इस माह के सभी व्रत त्योहार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इस दौरान आने वाले प्रदोष व्रत को शंकर जी की पूजा के लिए शुभ माना गया है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। सावन माह में आने की वजह से इस तिथि की महत्ता अधिक बढ़ जाती हैं। इस दिन व्रत रखने का भी विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

वहीं 19 अगस्त 2024 को सावन माह समाप्त हो रहा है। ऐसे में इस माह का दूसरा प्रदोष व्रत 17 अगस्त 2024 को रखा जा रहा है। ये व्रत सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन शनिवार होने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इसी कड़ी में आइए प्रदोष व्रत की पूजा विधि से लेकर शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
इस वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 17 अगस्त की सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 18 अगस्त सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में 17 अगस्त 2024 को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दौरान पूजा का समय संध्याकाल 6 बजकर 58 मिनट से रात 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
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Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
शुभ योग
सावन माह के अंतिम प्रदोष व्रत के दिन प्रीति योग का निर्माण होगा। ये योग प्रात: काल से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। वहीं फिर आयुष्मान योग प्रारंभ हो जाएगा, जो 18 अगस्त सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहने वाला है। मान्यता है कि इस योग में पूजा पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं।

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Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत पूजा विधि
सावन माह के अंतिम प्रदोष व्रत पर सुबह ही स्नान कर लें। इसके बाद भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करें। फिर प्रदोष काल में पूजा करने से पहले भी स्नान कर लें, और साफ वस्त्रों को धारण करें। अब मंदिर में चौकी लगाएं।

चौकी लगाने के बाद उसपर भगवान शिव के पूरे परिवार की तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले शिव जी और गणेश जी को चंदन का तिलक लगाएं। वहीं माता पार्वती को सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए। फिर शंकर जी को बेलपत्र, धतूरा, फूल आदि सब अर्पित करें। इसके बाद घी की दीपक जलाएं, और महादेव को मिष्ठान का भोग लगाएं। अंत में भगवान शिव की चालीसा का पाठ करें।
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Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस उपवास को रखने से व्यक्ति को ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति होती हैं। साथ ही कुंडली से ग्रह दोष भी दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में भी सुख-समृद्धि बनी रहती हैं।
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Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : free pic
भगवान शिव की आरती 
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। 
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। 
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। 
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। 
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । 
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी। 
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । 
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा। 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥  

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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