सावन में साग और दूध का सेवन न करने का वैज्ञानिक कारण
सावन में साग और दूध का सेवन न करने का वैज्ञानिक कारण
सावन का महीना वर्षा ऋतु का समय होता है, जब वातावरण में लगातार नमी बनी रहती है। इस मौसम में हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे भारी और संक्रमित चीज़ें आसानी से शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में दो खाद्य पदार्थ साग और दूध, स्वास्थ्य के लिहाज़ से जोखिम भरे माने जाते हैं। साग यानी हरी पत्तेदार सब्जियां इस मौसम में खेतों में उगती तो हैं, लेकिन उनमें कीड़े-मकोड़े, फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना बहुत अधिक होती है। साथ ही खेतों में कई तरह की जहरीली घास और अनचाही वनस्पतियां भी उग आती हैं, जो दिखने में हरी और ताज़ा लग सकती हैं लेकिन विषैले तत्व लिए होती हैं। इन सागों को यदि अच्छी तरह न धोया या पकाया जाए, तो ये पेट संक्रमण, फूड पॉइज़निंग और पाचन समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
दूसरी ओर, दूध एक ठंडा और भारी पदार्थ है, जिसे पचाना इस मौसम में कठिन हो जाता है। साथ ही, बारिश के कारण पशुओं का चारा भी गीला और दूषित हो सकता है, जिससे दूध की शुद्धता और गुणवत्ता प्रभावित होती है। खुले या असुरक्षित रूप से रखा गया दूध जल्दी खराब हो सकता है और उसमें बैक्टीरिया या फंगस पनपने का खतरा रहता है। यह शरीर में गैस, अपच, बलगम, और संक्रमण की समस्या पैदा कर सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।