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Rudrabhishek in Sawan: सावन में कब करें रुद्राभिषेक? जानिए पूजा का उत्तम समय और दिन

Thu, 10 Jul 2025 02:14 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rudarbhishek Importance: श्रावण महीना भगवान शिव को समर्पित पवित्र समय है, जिसमें भक्त उपवास, जप और रुद्राभिषेक द्वारा अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। इस दौरान सावन सोमवार, मंगल गौरी व्रत, शिवरात्रि और हरियाली अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाते हैं जो जीवन में सौभाग्य और समृद्धि लाते हैं।
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श्रावण माह में न केवल सोमवार, बल्कि अन्य दिन भी देवी-देवताओं की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला
Sawan Rudrabhishek Timing: श्रावण महीना, जिसे आमतौर पर सावन कहा जाता है, हिंदू पंचांग का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण समय होता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और भक्तगण पूरे महीने उपवास, जप, ध्यान और रुद्राभिषेक जैसे पूजन कर्मों के माध्यम से शिव भक्ति में लीन रहते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को “श्रावण सोमवार व्रत” के रूप में मनाया जाता है, जहाँ शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है। कई श्रद्धालु इस पावन महीने में सोलह सोमवार का व्रत भी आरंभ करते हैं, जो विशेष रूप से अविवाहित लड़कियों द्वारा उत्तम वर की प्राप्ति और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है।

श्रावण माह में न केवल सोमवार, बल्कि अन्य दिन भी देवी-देवताओं की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। जैसे कि मंगलवार, देवी पार्वती को समर्पित होता है और इस दिन महिलाएँ मंगल गौरी व्रत करती हैं, जिससे उन्हें दांपत्य जीवन में सौभाग्य और सुख की प्राप्ति हो। इसके अतिरिक्त, इस महीने में आने वाली सावन शिवरात्रि और हरियाली अमावस्या जैसे पर्व भी अत्यंत पुण्यदायक माने जाते हैं। सावन का हर दिन भक्ति, आस्था और प्रकृति के उल्लास से भरा होता है, जब न केवल मंदिरों में बल्कि घर-घर में भी भगवान शिव की महिमा गूंजती है।
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रुद्राभिषेक के दौरान भगवान शिव के शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद, और गंगाजल आदि से पूजा की जाती है।
सावन में रुद्राभिषेक का महत्व
इस पवित्र महीने में रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। रुद्राभिषेक के दौरान भगवान शिव के शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद, और गंगाजल आदि से पूजा की जाती है। इस अनुष्ठान से शिवजी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह परंपरा सावन के हर सोमवार को विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि इस दिन शिव की पूजा करने से अत्यधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
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इन शुभ तिथियों पर विशेष रूप से रुद्राभिषेक करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं। - फोटो : amar ujala
रुद्राभिषेक के लिए शुभ तिथियां
  • पहला सावन सोमवार - 14 जुलाई 2025
  • दूसरा सावन सोमवार - 21 जुलाई 2025
  • तीसरा सावन सोमवार - 28 जुलाई 2025
  • चौथा सावन सोमवार - 4 अगस्त 2025
  • सावन शिवरात्रि - 23 जुलाई 2025
  • नाग पंचमी - 29 जुलाई 2025
इन शुभ तिथियों पर विशेष रूप से रुद्राभिषेक करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं, स्वास्थ्य में सुधार आता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा सावन की पूर्णिमा और प्रदोष व्रत के दिन भी रुद्राभिषेक का बहुत महत्व होता है। यदि संभव हो तो इस पवित्र अनुष्ठान को ब्राह्मण द्वारा विधिपूर्वक करवाना श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन घर पर भी ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धा और भक्ति से अभिषेक करना अत्यंत फलदायक होता है। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है और भक्तों के जीवन में खुशहाली आती है।

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शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव को प्रसन्न करने के आसान उपाय
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रोज सुबह स्नान करके ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखें और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। हमेशा सच्चे दिल से प्रार्थना करें और किसी का दिल न दुखाएं। शिव पुराण का पाठ करें तथा ध्यान लगाकर भगवान शिव का स्मरण करें। सादगी, सत्यनिष्ठा और भक्ति भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। इन तरीकों से आप उनकी कृपा पा सकते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं सफलता का अनुभव कर सकते हैं।
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सावन मास पर यह अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माना जाता है।
रुद्राभिषेक के लाभ
रुद्राभिषेक एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है जिसमें भगवान शिव के शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद, दही और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। यह पूजा मानसिक शांति प्रदान करती है और जीवन में धन-संपदा, स्वास्थ्य और समृद्धि लाती है। रुद्राभिषेक से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और ग्रहों के दोष शांत होते हैं। विशेषकर सावन मास और शिवरात्रि के दिन यह अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माना जाता है। रुद्राभिषेक से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बाधाएं कम होती हैं और भक्तों को भगवान शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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