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Kamika Ekadashi 2025: सावन में कब है कामिका एकादशी ? जानिए तिथि, महत्व और पूजा विधि

Thu, 10 Jul 2025 12:58 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kamika Ekadashi 2025: सावन माह के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर कामिका एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना का विधान है। इसके प्रभाव से साधक को मोक्ष की प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि मिलती हैं। 
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Kamika Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
Kamika Ekadashi 2025 Date: 11 जुलाई 2025 से सावन शुरू हो रहा है। यह महादेव का प्रिय महीना है, जिसमें भव्य आयोजन के साथ शिव पूजन किया जाता है। मान्यता है कि सावन में प्रभु की उपासना करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। यही नहीं इस अवधि में आने वाले तीज-त्योहारों पर भी भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है। चूंकि इस दौरान चातुर्मास होता है, इसलिए सृष्टि का संचालन भी शिव जी करते हैं। ऐसे में एकादशी पर उनकी भी उपासना करना बेहद शुभ होता है।

बता दें, सावन माह के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर कामिका एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना का विधान है। इसके प्रभाव से साधक को मोक्ष की प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि मिलती हैं। अब सवाल यह है कि सावन में यह व्रत कब रखा जाएगा ?  तो आइए विस्तार से जानते हैं।
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Kamika Ekadashi 2025 - फोटो : freepik
कब है कामिका एकादशी
पंचांग के अनुसार सावन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 21 जुलाई दिन सोमवार को सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 21 जुलाई 2025 को कामिका एकादशी का व्रत किया जाएगा। यह सावन महीने की प्रथम एकादशी भी होगी।
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Kamika Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
कामिका एकादशी की पूजा विधि
  • एकादशी के दिन सुबह ही स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा के लिए सर्वप्रथम एक साफ चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसपर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
  • अब प्रभु को प्रणाम करते हुए पीले फूल, धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य आदि से पूजा करें।
  • इस दौरान तुलसी पत्र का विशेष महत्व है, इसलिए पूजा में इसे शामिल करें।

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Kamika Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
  • प्रभु के मंत्रों का उच्चारण करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु की आरती करें और उन्हें केसर या मखाने की खीर का भोग लगाएं।
  • अब शाम के समय एक बार फिर भगवान विष्णु की आरती करें और फलाहार ग्रहण करें।
  • रात में भजन-कीर्तन करते हुए अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण कर लें।

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Kamika Ekadashi 2025 - फोटो : Adobe Stock
भगवान विष्णु के खास मंत्र

भगवान विष्णु का बीज मंत्र
ॐ बृं

भगवान विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:

भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र
शांताकारं भुजगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
भगवान विष्णु का शक्तिशाली मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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Kamika Ekadashi 2025 - फोटो : Adobe Stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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