10 अक्तूबर को पितृपक्ष का समापन होगा। इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है और हिंदू धर्म में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा की शांति के लिए पुण्य प्राप्त होता है। जिन परिजनों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर उनका श्राद्ध नहीं हो पाया, उनके लिए भी इस दिन श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। ऐसे में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भोजन अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर सात प्रकार के खाद्य पदार्थों को श्राद्ध के भोजन में शामिल करना शुभ माना जाता है।