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Bhado Sankashti 2025: संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Tue, 12 Aug 2025 02:01 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Badrapad Sankashti Chaturthi: भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी को बहुला या हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के रूप में जाना जाता है, जो भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। इसे विशेष रूप से विघ्नों को दूर करने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।
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इस चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। - फोटो : Amar Ujala
Bhadrapad Sankashti Chaturthi Puja Vidhi: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुख-संपत्ति प्रदान करने वाला देवता माना गया है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए हर माह संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, लेकिन भाद्रपद महीने में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व होता है। इस चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी विघ्न और संकट दूर हो जाते हैं।
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इस दिन व्रत रखने वाले भक्त सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं, व्रत का संकल्प लेते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं। शाम को चंद्रोदय के समय भगवान गणेश और चंद्रमा की विधिवत पूजा की जाती है। खासतौर पर महिलाएं इस व्रत को अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए करती हैं। आगे जानें 2025 में भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्त्वपूर्ण मंत्र।
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12 अगस्त को ही भादो की संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। - फोटो : freepik
भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी 2025
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरम्भ: 12 अगस्त, प्रातः  08: 41 मिनट से 
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 13 अगस्त, प्रातः  06: 36 मिनट पर 
चूंकि चतुर्थी का चंद्र दर्शन 12 अगस्त, मंगलवार को होगा,इसलिए 12 अगस्त को ही भादो की संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। 
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शुभ मुहूर्त में गणपति बप्पा की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। - फोटो : freepik
भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत 2025 पूजा मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी पर पूजा का शुभ मुहूर्त: सायं 6: 50 मिनट से रात्रि 7:16 मिनट तक 
मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में गणपति बप्पा की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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चंद्रोदय का समय - फोटो : freepik
चंद्रोदय का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन चन्द्रोदय का समय रात 08 बजकर 59 मिनट पर है।
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घर के पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें। - फोटो : freepik
भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि 
  • इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • घर के पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें।
  • व्रत का संकल्प लें और पूजा की तैयारी करें।
  • एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • गणेश जी को दूर्वा, चावल, फूल, धूप, दीप, मोदक और लड्डू चढ़ाएं।
  • फिर गणेश मंत्रों, स्तोत्रों और भजन आदि का पाठ करें और आरती करें।
  • दिनभर व्रत का पालन करें – फलाहार या निर्जल व्रत रखें (जैसे श्रद्धा हो)।
  • रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें जल (अर्घ्य) अर्पित करें और फिर व्रत पूर्ण करें।
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भाद्रपद मास में गणेश जी की भक्ति और पूजा करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है - फोटो : freepik

भाद्रपद में गणेश पूजा का महत्व 
भाद्रपद का महीना भगवान गणेश को बेहद प्रिय माना जाता है, क्योंकि इसी महीने की शुक्ल चतुर्थी को उनका जन्मदिवस यानी गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। इस दिन से शुरू होकर दस दिनों तक पूरे श्रद्धा और उत्साह से गणेशोत्सव मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद मास में गणेश जी की भक्ति और पूजा करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

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भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत 2025 - फोटो : instagram

भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत 2025 – पूजा मंत्र 

हे हेरंब त्वमेवोहि झाम्बिकात्र्यम्बकात्मज।
सिद्धि-बुद्धि पते त्र्यक्ष लक्षलाभ पितुः पितः॥

नागस्यं नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम्।
भूषितं स्वायुधौदव्यैः पाशांकुशपरश्वधैः॥

अर्थ :
इस मंत्र में भगवान हेरम्ब गणेश का आवाहन किया गया है, जो माता अंबिका और भगवान त्र्यम्बक (शिव) के पुत्र हैं। वे सिद्धि-बुद्धि के स्वामी, तीन नेत्रों वाले, नागाभूषणधारी, चार भुजाओं वाले, और अपने आयुधों – पाश, अंकुश व परशु – से सुसज्जित हैं। इस मंत्र का जाप कर भक्त गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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