भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत 2025
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भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत 2025 – पूजा मंत्र
हे हेरंब त्वमेवोहि झाम्बिकात्र्यम्बकात्मज।
सिद्धि-बुद्धि पते त्र्यक्ष लक्षलाभ पितुः पितः॥
नागस्यं नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम्।
भूषितं स्वायुधौदव्यैः पाशांकुशपरश्वधैः॥
अर्थ :
इस मंत्र में भगवान हेरम्ब गणेश का आवाहन किया गया है, जो माता अंबिका और भगवान त्र्यम्बक (शिव) के पुत्र हैं। वे सिद्धि-बुद्धि के स्वामी, तीन नेत्रों वाले, नागाभूषणधारी, चार भुजाओं वाले, और अपने आयुधों – पाश, अंकुश व परशु – से सुसज्जित हैं। इस मंत्र का जाप कर भक्त गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं।
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