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Sakat Chauth 2021: सकट चौथ व्रत आज, जानें मुहूर्त, व्रत विधि, धार्मिक महत्व और कथा

Sun, 31 Jan 2021 12:25 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सकट चौथ 2021: हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह व्रत माघ माह की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। - फोटो : अमर उजाला
Sakat Chauth 2021: सकट चौथ व्रत आज है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह व्रत माघ माह की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत को महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी, और तिलकूटा पर्व के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, इस दिन तिलकूट बनाया जाता है। सकट चौथ के दिन पार्वती पुत्र भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसके साथ ही लोग सूर्य और चंद्रमा की पूजा भी करते हैं और अर्घ्य देते हैं। आइए जानते हैं सकट चौथ व्रत का मुहूर्त, व्रत विधि महत्व और कथा...
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सकट चौथ मुहूर्त 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
सकट चौथ मुहूर्त 2021
चतुर्थी तिथि आरंभ समय: 31 जनवरी 2021 की रात 08 बजकर 24 मिनट से 
चतुर्ती तिथि समाप्ति समय: 1 फरवरी 2021 को शाम 06 बजकर 24 मिनट पर
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सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से गणेश जी सारे संकटों को दूर करते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ का व्रत माताएं अपनी संतान के सुखी, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना के साथ करती हैं। मान्यता है कि सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से गणेश जी सारे संकटों को दूर करते हैं और संतान को लंबी आयु एंव खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। इस दिन घर में तिल और गुड़ की चीजें बनाई जाती हैं। भगवान को तिलकूट और मौसमी चीजें जैसे गाजर और शकरकंद चढ़ाई जाती हैं।

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सकट चौथ पूजा विधि - फोटो : Pixabay
सकट चौथ पूजा विधि
  • सुबह स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • गणेश भगवान का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान गणेश को पीले वस्त्र पहनाएं और स्थापित करें। 
  • गणेश जी को सिंदूर, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप और जल आदि अर्पित करें।
  • गणेश पूजन के बाद रात में चंद्रयोदय होने के बाद दूध में शहद, चंदन, रोली मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • प्रसाद में चढ़ाए गए लड्डू ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
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सूर्यास्त के बाद चंद्रमा को तिल, गुड़ का अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलना चाहिए। - फोटो : सोशल मीडिया
सकट चौथ पर तिल का महत्व
सूर्यास्त के बाद चंद्रमा को तिल, गुड़ का अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन तिल से बनी चीजों का सेवन करने से व्यक्ति के पाप कट जाते हैं। इस दिन तिल का दान करने से भी लाभ होता है। 
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सकट चौथ की व्रत कथा - फोटो : Pixabay
सकट चौथ की कथा
एक प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के राज में एक कुम्हार रहा करता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आवा लगाया, पर बहुत देर तक आवा पका नहीं। बार-बार नुकसान होता देखकर कुम्हार एक तांत्रिक के पास गया और उसने तांत्रिक से मदद मांगी। तांत्रिक ने उसे एक बालक की बली देने के लिए कहा। उसके कहने पर कुम्हार ने एक छोटे बच्चे को आवा में डाल दिया, उस दिन संकष्टी चतुर्थी थी। उस बालक की मां ने अपनी संतान के प्राणों की रक्षा के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना की। कुम्हार जब अपने बर्तनों को देखने गया तो उसे बर्तन पके हुए मिले और साथ ही बालक भी सुरक्षित मिला। इस घटना के बाद कुम्हार डर गया और उसने राजा के सामने पूरी कहानी सुनाई। इसके बाद राजा ने बच्चे और उसकी मां को बुलवाया तो मां ने संकटों को दूर करने वाली सकट चौथ की महिमा का गुणगान किया। तभी से महिलाएं अपनी संतान और अपने परिवार की कुशलता और सौभाग्य के लिए सकट चौथ का व्रत करने लगीं।
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